भारतकोश
मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary

कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

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मुकुन्दमाल 49 ध्यानिञ्चि वाडुकचेसि कोनवलेनु. प्रथमसोपानमु भगवत्पादारविं दमु. तामर पुष्पमुन कुण्डु वासन ई चरणमुनकु गलदा यनिन वेदमुलु, उपनिषत्तुलु, नारदुलु कोनियाडुचुण्डुटे वासन. सर्व दष्टुनिकि चक्केर चेदैनटुलु मनकु भगवन्तुनि संगति चेदैयुन्नदि. नारदादुलकु तीपिगनुन्नदि. ई पुष्पमुनु धरिञ्चिनटुलु आ पुष्प मुनेत्लु धरिम्पवच्चुनु अनिन रत्नाल अंगडिलोनि नगलनु राजुलु धरिञ्चुचुन्नारु. दरिद्रुलकु आ याभरणमुलु लभिञ्चवु. अट्ले आ पुष्पमुनु धरिञ्चुवारु ब्रह्मादुलु. वारिकदि शिरोभूषणमु. मन्नु, जलमु चेरियुण्डु प्रदेशमुन पुष्पमु मोलचुनु. ई पुष्पमे च्चट मोलचिनदि यनगा कावेरि कोल्लडमु चेरिनस्थलमु चल्लगनुण्डगा नच्चट पुट्टेनु. हंस लुन्नवा यनिन परमहंसलैन सनकादुलु आश्रयिञ्चिरि. तामरपुष्पमु ओक्कटिग पुट्टदु; गुम्पुग मोलचुने यनिन श्रीदेवी भूदेवुल करसरसिजमुल नडुम नैदवदियै युन्नदि. आ पुष्पमु ए जलमुन प्रतिफलिञ्चे ननिन ना मनोभावन यनु सरस्सुन प्रतिफलिञ्चेनु. इत्लनि वेदान्तदेशिकुलु विन्नविञ्चिरि. कुल : स्वामी! नी पादमुलनु मरण कालमुनन्दे तलचिननु चालुनु. यं यं वापि स्मरन् भावं त्यजत्यन्ते कळेबरम्, तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद्भावभावितः. -- गीत. 8.6 तस्मा त्सर्वेषु कालेषु मा मनुस्मर युध्य च, मय्यर्पित मनोबुद्धि र्मामेवैष्य स्यसंशयः. -- गीत. 8.7 अनु श्लोकमुलन्दु सदा तलचुचुण्डिनने अन्त्यकालमुन स्मरण कल्गुनंटिवि. अदियुनु गाक वराह पुराणमुन ‘शरीरमु दृढमुग 5