मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary
कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमत्तः परतरं नान्यत्किञ्चिदस्ति धनञ्जय, मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव. नीवु अन्निटिकि पैवाडवु. परमु, परतरमु नीवे. नीकु पैवस्तुवु लेदु. नीवु परत्वमुन आ रीतिग नुंडिननु सौलभ्यमुनु जूपुटकु नन्दगोपतनयुडवै युन्नावु. वसुदेवुनि यॊद्दनुंडिन नी सौल भ्यमुनु जूपुटकु सरिपडदनि यॆञ्चि नन्दगोपु निण्ट चेरि यतनिकि तनयुड वैतिवि. परत्वसौलभ्यमुलन्दु निन्नु मिञ्चिनवारु लेरु. स्वामि : ने निपुडु सौलभ्यमुनु जूपुटकयि मानुषरूपमुनु धरिञ्चि युन्नानु. नित्यविभूतिनि विडिचि लीलाविभूतिकि वच्चि युन्नानु. आ शरीरमुतो नुंडलेदु. नेनु सौलभ्य मुने चूपुचुण्डुटचेत सौलभ्यमुने चर्पिम्पवलयुनु. परत्वमु नॆत्लु चॆप्पनगुनु? दानिनि गूर्चि प्रशंसिम्पने रादुगदा? ना रीतिकि तगिनट्लु गदा स्तुतिञ्चवलयुनु? योचिम्पक "कृष्ण त्वदीय पदपङ्कज पञ्जरान्त मद्यैव मे विशतु मानसराजहंसः" अण्टिवि. कुल : स्वामि! योचिञ्चिये अट्लण्टिनि. नीवु नारदादि मुनि बृन्द वन्दितुडवु. इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्या म्यनसूयवे, ज्ञानं विज्ञानसहितं यद् ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्. -- गीत. 9.1. अन्नट्लु मूढुलु नि न्नवमतिन्तुरु. अव्यक्तं व्यक्ति मापन्नं मन्यन्ते मा मबुद्धयः, परंभाव मजानन्तो ममाव्यय मनुत्तमम्. -- गीत. 7.24