भारतकोश
मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary

कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

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मुकुन्दमाला ६३ कुल : मनसा! अटु लनकुमु. नीकु सुखमु तेलियदु. रुचि तेलियदु. अन्दुचेत परुगेत्तजूचुचुन्नावु. नेनु निन्नु निर्बन्धिञ्चि कूर्चुण्डबेट्टेदनु; कदलकुण्डुमु. ओक चिन्न उद्योगस्थुडु गोप्प युद्योगमुनु गोरि यजमा नुनि दय सम्पादिञ्चुटकै कౙ్జिकाय लनु भक्ष्यमुलनु यजमानुनि किच्चेनु. अत डेन्नडु वाटिनि भक्षिञ्चिनवाडु कानन्दुन दानि कोननु कोरिकि चूचि उप्पु कारमु तीपि मोदलगु ने रसमुनु लेनन्दुन कोपगिञ्चुकोनि तन का तिनुबण्डमु लिच्चिनवानि नुद्योगमु नुण्डि तोलगिञ्चेनु. आ तिनुबण्डमु चूचुटकु मात्रमु अन्दमुग नुण्डि नन्दुन दानि नेत्ति बीरुवायम् दुञ्चियुण्डि रेण्डु मूडु दिनमुलु गडुवगने दानिलोपल ए मुन्नदो चूत मनि विप्पि लोपल पूर्णमुण्डुटनु जूचि, कोन्त नोट वेसि कोनि, दानि रुचिकि सन्तोषिञ्चि दानि निच्चिनवानिगति नधोगति पालुचेसि नन्दुलकै चिन्तिञ्चि वानिनि पिलिपिञ्चि मुनुपटिकण्टेनु गोप्प युद्योग मिप्पिञ्चि मन्निञ्चेनु.

वेदमु योक्क पैभागमुनु कोरिकिन मनकु रुचितेलियदु. नार दादुलु लोपल प्रवेशिञ्चि रुचिचूचिनवारु. वारिके आ रुचि तेलियुनु.

या निशा सर्वभूतानां तस्यां जागर्ति संयमी, यस्यां जाग्रति भूतानि सा निशा पश्यतो मुनेः. -- गीत. २.६९

पैश्लोकमट्लु एल्लवारु प्रेमिञ्चु विषयमुलु ब्रह्मज्ञानिकि पट्टवु. आ विषयमु लतनिकि रात्रि. इतरुलकु पट्टनि आत्मविषय मतनिकि पट्टुनु. अदि यतनिकि पगलु.