भारतकोश
मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary

कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा

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64 मुकुन्दमाल (मनसा! एमि चेयुटकै वेडलिपोवुचुन्नावु? सुखमु लेनि तावुल संचरिंचेदवु. सुखमुंडु चोट निलुववु. उपनिषत्तु लंदु जेप्पबडिन भगवत्कल्याणगुणमु लनेडु तेनेनु पानमु चेयरादा? निन्नु ईड्चि यीड्चि तेवलसिन ట్లున్నदि (त्लुन्नदि). निन्नु बागुग कूर्चुंड बेट्टिननु नीवु मऱियु परुगेत्ति पोवुचुन्नावु. अट्लुपोयिननु सरियैन स्थलमुनकु पोयितिवा? परधन परदार परगृहमुलनु अपहरिंचु विषयमुन जोच्चेदवु. ने नुंचिन स्थलमुनं दुंडि यनुभविंचि चूचितिवेनि नीकु रुचि तेलियुनु. नीवु पोरानिचोटुलकु बोयिननु नी का वस्तुवुलु लभिंचेना? नी गति परितापकरमुग नुन्नदि. तुदकु नीवु चेडि नन्नुनु चेऱचेदवु. नीवु पदिलमुग नुंडुनेड मन मिरुवुरमुनु सुखपडवच्चुनु गदा अनि योक goप्प (गोप्प) योगीश्वरडु मनसुनु गूर्चि चेप्पेनु.) आ या कारणमुलचेत मनसा! स्वामिनि अनुभविंचुटनु मान कुमु. विडिचिपोक निलुवुमु. मनस्सु : अट्लैन नीवु चेप्पु स्थलमुलो सुखमु गलदा? अट्लु निजमुग सुखमुंडु पक्षमुन ने नक्कडे निवसिंचेदनु. कुल : मनसा! आ शृंगार मेमनि वर्णिंतुनु. सर्वेन्द्रिय मुललो नयनमु प्रधानमयिनदि कदा! आ सर्वेश्व रुनि योक्क कन्नुलु तामरपुष्पमुलवले अंदमुग नुन्नवि. मनस्सु : ओहो! अंत शृंगारमा? अटुलयिन तृप्तिपोंदि तिनि. मऱियोक संगति गलदु. ने नचट वसिंचु नपुडु दुष्टमुलैन इन्द्रियमुलु वच्चि न न्नीड्चुको निपोवुनु. नेनु वानिवेंट बोदुनु. वानिनि शिक्षिंचि दूरमुग तऱिमि नन्नु कापाडुकोनु पक्षमुन नेनु अच्छटने युंदुनु. लेकुन्न निन्द्रियादुलतोड पोवु