नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
DevanagariHindipublished309 पृष्ठ
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( ६७ ) पत्ते की हवा गरम है । चेटी - राजकुमारी ! (तो) इस का दोष मत कहो - घने चन्दन के पत्तों के सम्पर्क से शीतल इस केले के पत्ते की हवा को भी आप ही (अपनी) आहों से गरम कर रही हैं। नायिका - (आंसुओं के साथ) सखी, क्या इस सन्ताप को शान्त करने का कोई भी उपाय है ? चेटी - राजकुमारी, है तो, यदि "वह" यहां आ जाए। [नायक तथा विदूषक का प्रवेश]