नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ७७ ) चेटी - राजकुमारी ! मुझे लगता है मानों कोई स्वप्न की बातचीत हो रही है । तो हम सावधान हो कर सुनें । [दोनों सुनती हैं] विदूषक- (हाथ से हिलाते हुए) अरे मित्र, मैं कहता हूँ यह है वही चन्द्रमणिशिला । नायक - (आँसुओं के साथ, गहरी साँस ले कर) ठीक देखा है । (हाथ से इशारा करके) - यह वही चन्द्रमणिशिला है जहाँ पल्लव के समान कोमल बाएँ हाथ पर (अपने) पीले मुख को रखकर गहरी आहें भरती हुई, मेरे देर करने पर भौहों के थोड़ा फड़कने से जिसके (मन) का (प्रणय कोप रूपी) अभिप्राय स्पष्ट था, परन्तु मनोगत क्रोध को रोक कर रोती हुई प्रिया को मैंने देखा था । तब तो इसी चन्द्रमणिशिला पर बैठें । (दोनों बैठते हैं) नायिका - (सोचकर) यह कौन होगी ? चेटी - राजकुमारी, जैसे हम छिप कर उसे देख रही हैं, कहीं तू ही इस
- सति सप्तमी ।
- आकूत = भाव, अभिप्राय ।
- मनाक् = थोड़ा, धीरे से