नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
DevanagariHindipublished309 पृष्ठ
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( ११५ ) चेटी — राजकुमारी (मलयवती) की माता जी ने मुझे आज्ञा दी है कि 'अरी नवमालिका ! कुसुमाकर उद्यान में जाकर उद्यानपालिका । (मालिन) पल्लविका से कह कि “आज अच्छी तरह से तमालवीथी (तमालवृक्षों के बीच का मार्ग) सजाओ । (क्योंकि) मलयवती के साथ जामाता (जीमूतवाहन) वहां जाएँगे ।” और मैं ने पल्लिका को आज्ञा दे दी है। अतः अब रात भर के वियोग से बढ़ी हुई उत्कण्ठा वाले अपने प्रिय स्वामी शेखरक को ढूंढती हूँ । (देख कर) यह रहा शेखरक ! (क्रोध के साथ) क्या किसी दूसरी स्त्री को प्रसन्न कर रहा है ? अतः यहीं ठहर कर ही मालूम करती हूँ कि यह कौन है । विट — (हर्षपूर्वक) हे नवमालिकां ! जो शेखरक गर्व के कारण विष्णु, शिव अथवा ब्रह्मा को भी प्रणाम करना नहीं जानता, वह तेरे चरणों पर पड़ रहा है ।
- वीथिका = गली; सड़क; रास्ता, मार्ग ।
- पितामह = दादा अथवा ब्रह्मा ।