भारतकोश
नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

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पृष्ठ 153

( १२१ ) (गले लगाती है) दामाद (जीमूतवाहन) के इस प्रिय मित्र के साथ तुम ने दुर्व्यवहार किया है 1 यह सुन कर कहीं स्वामी मित्रावसु तुम्हें नाराज हों । इसलिए आदर के साथ इनका सम्मान करो । विट - जो नवमालिका की आज्ञा । (विदूषक को गले लगाकर) आर्य? आप हमारे सम्बन्धी हैं यह सोचकर ही हँसी मज़ाक किया है है । (झूमता हुआ) क्या सचमुच शेखरक मदमस्त है ? (नहीं) मज़ाक ही किया है । (चादर को गोलकर आसन बनाकर देता है.) सम्बन्धी जी, यहां बैठिए । विदूषक-(मन ही मन) भाग्यवश जान पड़ता है मानों इसके नशे का जोश उतर गया है । [ बैठता है] विट - नवमालिका ! तू भी इसी के पास बैठ जा ताकि तुम दोनों का सम्मान एक साथ ही कर सकूं !

  1. खल + च्वि + क्त । अपमान करना; कष्ट देना; बुरा व्यवहार करना ।
  2. मज़ाक किया है । अथवा, मज़ाक हो चुका; मज़ाक को छोड़िए ।