भारतकोश
नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

DevanagariHindipublished309 पृष्ठ

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पृष्ठ 155

( १२३ ) चेटी— (हँसती हुई बैठ जाती ) विट— (शराब का प्याला लेकर) अरे चेट ! इस प्याले को बढ़िया शराब से अच्छी तरह भर दे । चेट— (प्याला भरने का अभिनय करता है) विट— (अपने सिर के मुकुट से फूल लेकर प्याले में डाल कर, घुटनो के बल बैठ कर नवमालिका के पास ले जाता है) नवमालिका !' चख कर यह इसे दो । चेटी—(मुस्कराते हुए)—जैसे शेखरक कहे । [वैसा ही कर के विट को दे देती है ] विट— (विदूषक को प्याला देता है)—नवमालिका के मुख के सम्पर्क से विशेष रूप से सुगन्धित इस रस को पिओ जिसका स्वाद शेखरक को छोड़ अभी तक और किसी ने नहीं लिया ! इस से बढ़ कर और मैं तेरा क्या आदर कर सकता हूँ । विदूषक—(विचित्र अथवा बनावटी हँसी के साथ) शेखरक ! मैं (तो) ब्राह्मण हूँ । ————————————————————————

  1. घबराहट की हँसी; कृत्रिम हँसी; दिखावे की हँसी; विचित्र हँसी ।
  2. ब्राह्मण के लिए मद्यपान वर्जित है—‘‘ब्राह्मणो मद्यपानाद्धि ब्राह्मण्यादेव हीयते’’।