नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १३१ ) मीठा बोलना भी जानते हैं । चेटी - (हँसकर) अरी उल्टी बातें कहने वाली ! यह तो सच्चाई है । इस में मीठा बोल (चापलूसी) क्या है ? नायक - चतुरिका ! कुसुमाकर उद्यान का मार्ग बता । चेटी - आइए, स्वामी ! आइए । नायक - (घूमते हुए, नायिका से) देवी ! ज़रा धीरे धीरे आइए । तुम्हारे स्तनों का भार ही तुम्हारी कमर को कष्ट देने के लिए (पर्याप्त) है, फिर दूसरे हार से क्या (लाभ) ? नितम्बों के भार से ही दोनों जंघाएँ खिन्न हैं; फिर इस मेखला से क्या (लाभ) ? दोनों जँघाओं को वहन करने की शक्ति (भी) तेरे पैरों में नहीं फिर यह नूपुर (पाज़ेब) क्यों ? तुम तो अपने (सुन्दर) से ही विभूषित (सजी हुई) हो, फिर (इन अङ्गों को) क्लेश देने के लिए इन आभूषणों को क्यों धारण कर रही हो ? चेटी - यही वह कुसुमाकर उद्यान है । तो स्वामी प्रवेश करें । [सब प्रवेश करते हैं]
- विरोधी पक्ष का समर्थन करने वाली; विरुद्ध, विपरीत अथवा प्रतिकूल भाषिणी; उल्टी बातें करने वाली ।
- थक गई हैं; खिन्न हैं; क्लेश अनुभव कर रही हैं ।