नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १३३ ) नायक— (देखकर) अहा, इस कुसुमाकर उद्यान की शोभा कितनी उत्कृष्ट है ! यहाँ— चन्दन वृक्षों से चूता हुआ रस लताकुञ्ज में वेदी के किनारों को ठण्डा कर रहा है; समीप ही फ़व्वारों की ध्वनि के पश्चात् मोर नाचने लगा है; जल यन्त्रों से निकला हुआ, ज़ोर से गिरने से पीड़ित फूलों की धूलि को हरण करने से पीला हुआ, यह जल का समूह प्रवाह) वृक्षों की क्यारियों को भरता हुआ बड़े वेग से बह रहा है। और भी— गाना शुरू करने से लताकुञ्जों के (भीतरी) भागों को शब्दायमान करने वाले, फूलों की धूलि से स्पष्ट अङ्गराग धारण करने वाले, अपनी प्रियाओं के साथ मधु-रस का पर्याप्त पान करते हुए ये भौंरे यहां चारों ओर (मानों) पान महोत्सव (शराब पीने का उत्सव) मना रहे हैं । विदूषक- (पास जाकर) महाराज की जय हो । देवी, आपका कल्याण हो ।
- वेदी अथवा फ़र्श । चबूतरा ।
- फ़व्वारों का घर । फ़व्वारे । प्रपात गृह ।
- पीला; लालपीला; सुनहरी । 4. सुगन्धित पाऊडर; अङ्गराग ।
- व्यतिकर: = मेल; सम्पर्क; अदला बदली ।