नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
DevanagariHindipublished309 पृष्ठ
पृष्ठ 169, कुल 309 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 169
( १३६ ) चेटी — (मुस्कराते हुए, विदूषक से) क्या तुम ने सुना किस प्रकार राजकुमारी का वर्णन किया गया है। विदूषक — (मुस्कराते हुए) चतुरिका ! इस प्रकार गर्व न कर । हमारे बीच भी सुन्दर व्यक्ति है। केवल ईर्ष्या से कोई (उसका) वर्णन नहीं करता । चेटी — (मुस्कराते हुए) आर्य ! मैं आप का वर्णन (गुणों की प्रशंसा, अथवा, रंगना) करती हूँ। विदूषक — (हर्षपूर्वक) श्रीमति, मानों मैं जी पड़ा। अतः मुझ पर कृपा कीजिए जिस से यह फिर मुझे यह न कह सके कि 'तू ऐसा है, वैसा है, भूरे बन्दर की शक्ल वाला है' इत्यादि । चेटी — आर्य ! विवाह में जागरण के समय आँखें बन्द कर के ऊंघते हुए आप मुझे बड़े सुन्दर दिखाई दे रहे थे। अतः उसी अवस्था में बैठे रहो ताकि मैं वर्णन करूं ।
- 'वर्णयामि' के दो अर्थ हैं। विदूषक इस का 'गुणों की प्रशंसा' अर्थ लेता है। परन्तु चेटी 'रंगना' अर्थ में इस का प्रयोग करती है।
- मेरी जान में जान आ गई।