नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
DevanagariHindipublished309 पृष्ठ
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( १८६ ) कञ्चुकी— यह वस्त्रों का जोड़ा मित्रावसु की माता महारानी ने आप- के लिए भेजा है। अतः आप इन्हें पहिन लें। नायक—(आदरपूर्वक) लाओ। कञ्चुकी— (पास ले आता हैं) नायक— (लेकर, मन ही मन) मेरा मलयवती के साथ विवाह करना (अद्य) सफल हो गया। (प्रकट) कञ्चुकी ! जाओ महारानी को मेरी ओर से प्रणाम कर देना। कञ्चुकी— जो कुमार की आज्ञा। [प्रस्थान] नायक—उचित समय पर आए हुए ये दो लाल वस्त्र परोपकार के लिए शरीर त्यागने वाले मुझे अत्यन्त प्रसन्नता दे रहे हैं। (चारों दिशाओं में देखकर) जिस प्रकार मलयपर्वत की चोटी के पत्थरों के ढेरों को हिलाता हुआ पवन प्रचण्ड (हो रहा) है, उस से मेरा विचार है कि निश्चय ही पक्षिराज गरुड़ समीप ही आ पहुँचा है। क्योंकि— १. नभस्वान् = हवा !