भारतकोश
नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

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( २४१ ) वृद्धा—हाय बेटा ! हा प्यारे ! गुरुजनों के प्रिय ! तुम कहां हो ? मुझे जवाब दो ! जीमूतकेतु—हाय पुत्र जीमूतवाहन ! हा प्रेमीजनों के प्यारे ! हा सब गुणों के खजाने ! तुम कहां हो ? मुझे उत्तर दो। (हाथों को ऊपर फेंक कर) हाय रे बड़ा कष्ट है !! हे पुत्र तुम्हारे परलोक सिधार जाने पर धैर्य निराश्रय हो गया है। विनय किस की शरण ले ? यहां शान्ति को धारण करने में कौन समर्थ है ? दानशीलता समाप्त हो गई। सच्चाई सचमुच नष्ट हो गई। बेचारी करुणा आज कहां जाए । (तुम्हारे बिना) सारा संसार ही सूना हो गया है। मलयवती—हाय प्राणनाथ ! मुझे छोड़ कर चले गए हो ? अत्यन्त निर्दय मलयवती ! (और) तुझे क्या देखना है जो इस समय तक जी रही है ?

  1. सति सप्तमी ।