भारतकोश
नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

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( २५ ) और फिर, यदि मरने से पहिले मन्दिर पूजा आवश्यक थी तो नाटककार को नायक के लिए इस का विचार क्यों नहीं आया ? ४. नायक की आपत्ति में मलयवती के घर वालों की उदासीनता भी अखरती है । वे ही द्वारपाल को यह जानने के लिए भेजते हैं कि दामाद समुद्र तट से लौटा है कि नहीं । द्वारपाल से उन्हें सूचना मिल जाती है कि नायक कहीं नहीं मिला । फिर वे क्यों मौन बैठे रहते हैं ? वध्य भूमि पर उन को क्यों नहीं ला दिखाया गया ? परन्तु इन गौण दोषों के कारण हम नाटक के वास्तविक गुणों को भूल नहीं सकते । जीमूतवाहन में आत्मत्याग तथा दाक्षिण्यता के उच्च तथा कठिन आदर्श का समावेश सर्वथा सफल हैं । श्रृङ्गार तथा करुणा के वातावरण गढ़ने में और कविता लिखने में श्री हर्ष सिद्ध-हस्त हैं ।