नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
पृष्ठ 294, कुल 309 में से
संदर्भ में पढ़ें( २७१ ) हथियार तीरकमान हैं--- तीर फूलों के (देखो ऊपर नं०: ८) और कमान की डोरी भँवरों की पंक्ति। अधिक विस्तार के लिए देखिए ऊपर टिप्पण (१) १२. पितामह = दादा = पिता के पिता। प्रायः ब्रह्मा को पितामह कहते हैं क्योंकि वे दस प्रजापतियों के पिता हैं, जिन से कि सारी सृष्टि की उत्पत्ति हुई। चतुर्थ अंक: — १३. वैनतेय = विनता का पुत्र, गरुड़। विनता के दो पुत्र थे। दूसरा, अरुण, सूर्य का सारथि है। इन के पिता का नाम कश्यप था। गरुड़ पक्षियों का राजा कहलाता है। वह सांपों का शत्रु है। गरुड़ विष्णु की सवारी है। कहते हैं एक बार विनता तथा सांपों की माता कद्रु में झगड़ा हो गया कि इन्द्र के घोड़े का रंग क्या है। इसमें विनता को हार हुई और शर्त के अनुसार उसे कद्रु की दासी बन कर रहना पड़ा। उसे मुक्त कराने के लिए गरुड़ इन्द्र से लड़ कर अमृत लाया। विनता तो मुक्त हो गई परन्तु अमृत को इन्द्र सांपों से छीन ले गया। १४. विश्वामित्र = वस्तुतः विश्वामित्र एक क्षत्रिय राजा थे। वे गाधि के पुत्र थे उनकी राजधानी कान्यकुब्ज थी। एक दिन शिकार खेलते खेलते वे वसिष्ठ जी के आश्रम में पहुंचे। वहां उन्हों ने कामधेनु देखी। उसे पाने के लिए उन्हों ने अमित धन सम्पत्ति देने को कहा, परन्तु वसिष्ठ जी ने उसे स्वीकार नहीं किया। विश्वामित्र बलात् ले जाना चाहते थे, परन्तु मुँह की खाई। इस पराजय से वे बहुत खिसियाना हुए।