नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें(२७३) पश्चात् एक काफ़िला से जा मिला। एक घोर वन में एक दुष्ट हाथी ने इस के सब साथियों को मार दिया। कई दिन घूमने के पश्चात् यह राजा नाड़ीजङ्घ के हां पहुँचा। उसने अपने मित्र राक्षसराज विरूपाक्ष के पास भेज दिया। वहां से अमित धन सम्पत्ति प्राप्त करके आप नाडीजङ्घ के पास लौट आए। घर लौटते समय स्वयं नाडीजङ्घ को मार कर उस के मांस को भून कर साथ ले लिया। परन्तु विरूपाक्ष ने पकड़ कर उसे वहीं ला मारा। जब इन्द्र को नाडीजङ्घ की मृत्यु का पता चला तो वह अमृत लेकर आया और उसे पुनर्जीवित कर दिया। नाडीजङ्घ की प्रार्थना पर गौतम को भी जिला दिया गया और नाडीजङ्घ ने बहुत से उपहार देकर उसे विदा किया। परन्तु देवताओं ने उसे शाप दिया कि उस शबरी विधवा से तेरे जैसे दुष्ट कई पुत्र उत्पन्न हों और मृत्यु के पश्चात् तू घोर नरक में पड़े ! १६. दक्षिणगोकर्ण = गोकर्ण दक्षिण मे एक तीर्थ का नाम है। यह शैवों का तीर्थस्थान है। इस के साथ दक्षिण शब्द लगाना इस लिए आवश्यक है क्योंकि इसी नाम का एक तीर्थस्थान उत्तर में नेपाल में भी है। पञ्चम अङ्कः— १७. जाह्नवी = गङ्गा। इस नाम की व्युत्पत्ति इस प्रकार बताते हैं कि जब अपने प्रपितामहों का उद्धार करने के लिए राजा भगीरथ गङ्गा को लिए जा रहे थे तो मार्ग मे इस के जल से राजा जह्नु का यज्ञस्थान प्लावित हो गया। राजा ने क्रोध करके इस के समस्त जल को पी लिया। तदनन्तर देवताओं तथा भगीरथ के प्रार्थना करने पर उन्हों ने कानों द्वारा उसे मुक्त कर दिया।