भारतकोश
नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

DevanagariHindipublished309 पृष्ठ

पृष्ठ 297, कुल 309 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 297

( २७४ ) १८. मेरु = कहते हैं मेरु पर्वत पृथ्वी के मध्य में स्थित है। और इस के इर्द गिर्द सारे सितारे घूमते हैं। यह सोने तथा रत्नों की खान बताई-गई है। सात वर्षपर्वतों में से एक है। १९. मन्दर = जब देवताओं तथा राक्षसों ने क्षीर सागर में से अमृत मन्थन किया था तो मन्दर पर्वत को ही मथनी बनाया था। २०. हिमवत् = हिमालय भारत के उत्तर में स्थित पर्वत श्रेणी। यह भी सात वर्षपर्वतों में से एक है। २१. महेन्द्र = यह सात कुलपर्वतों में से एक पर्वत है। पूर्वी घाट पर्वतमाला का वह भाग जो उड़ीसा प्रान्त के ज़िला गञ्जम में स्थित है। २२. कैलास = यह हिमालय की एक चोटी है जो शिव तथा कुबेर का निवासस्थान बताई गई है। २३. मलय = महेन्द्र के समान सात कुलपर्वतों में से एक। (देखो ऊपर नं० : ६) २४. लोकालोक = हिन्दू पौराणिक भूगोल के अनुसार पृथ्वी सात द्वीपों की बनी हुई है जिन के चारों ओर सात ही समुद्र हैं। लोकालोक एक ऐसा पर्वत है जो सारे विश्व को घेरे हुए है और सातवें द्वीप को घेरने वाले समुद्र से भी आगे स्थित है। इस पर्वत से आगे पूर्ण अन्धकार है। प्रकाश केवल इस की इस ओर ही है। इस प्रकार यह पर्वत दृश्य लोक को अन्धकारमय देश से पृथक् करता है।