नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २७६ ) 'नन्दन्ति काव्यानि कवीन्द्रवर्गाः कुशीलवाः पारिषदाश्च सन्तः । यस्मादलं सज्जनसिन्धुहंसी तस्मादियं सा कथितेह नान्दी ॥' कभी इससे देवता के अतिरिक्त ब्राह्मण तथा राजादिकों की भी आशीर्वाद-युक्त स्तुति की जाती है:— “आशीर्वचन संयुक्ता स्तुतिर्यस्मात्प्रयुज्यते । देवद्विजनृपादीनां तस्मान्नान्दीति संज्ञिता ।” २. सूत्रधार — सूत्रधार का शब्दार्थ है 'सूत्र को धारण करने वाला', 'शिल्पी', अथवा 'गृहकार' । नाटक में सूत्रधार एक विशेष पात्र होता है जो नाटक के खेले जाने का प्रबन्ध करता है । प्रस्तावना अथवा स्थापना में आकर सूत्रधार नाटक की कथावस्तु, अथवा नाटककार, अथवा नायक के गुणों की सूचना देता है । और वह रङ्गमञ्च को सजाने में भी बड़ा चतुर होता है ।:— “आसूत्रयन् गुणान् नेतुः कवेरपि च वस्तुनः । रङ्गप्रसाधनप्रौढः सूत्रधार इहोदितः ॥” ३. नेपथ्य — इस शब्द की व्युत्पत्ति सन्दिग्ध है। इसका अर्थ है किसी पात्र के कपड़े अथवा वेष-भूषा । विस्तृत रूप में इसका अर्थ पात्रों के 'वस्त्र पहिनने का कमरा' हो जाता है जिसे रंगमञ्च से एक पर्दे के द्वारा पृथक् किया जाता है ।:—