नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २७८ ) ५. काञ्चुकीय (कंचुकी) —यह शब्द कञ्च् धातु से निकला है जिस का अर्थ है बान्धना या चमकना। काञ्चुकीय का अर्थ है कंचुक को धारण करने वाला। अन्तःपुर के विशेष वृद्ध ब्राह्मण सेवक को काञ्चुकीय कहते हैं। इस का वर्णन इस प्रकार से किया गया है:— “अन्तःपुरचरो वृद्धो विप्रो गुणगणान्वितः । सर्वकार्यार्थकुशलः कंचुकीत्यभिधीयते ॥” मातृगुप्त ने इस का लक्षण यह बताया है:— “ये नित्यं सत्यसंपन्नाः काम-दोष-विवर्जिताः । ज्ञान-विज्ञान-कुशलाः कंचुकीयास्तु ते स्मृताः ॥” अर्थात् कञ्चुकी सदा सत्य बोलता है, कामदोषों से रहित होता है और ज्ञान तथा विज्ञान में कुशल होता है। ६. प्रवेशक — यह एक ऐसा दृश्य है जिसे दो अंकों के बीच में रखा जाता है। इस में नीच पात्र (भृत्य आदि) काम करते हैं जो प्राकृत बोलते हैं। इस से दो अङ्कों को परस्पर जोड़ा जाता है। इसके द्वारा उन घटनाओं का उल्लेख किया जाता है जो रङ्गमञ्च पर नहीं दिखाई गईं या नहीं दिखाई जा सकतीं ! दो अङ्कों के बीच में आने के कारण प्रथम अङ्क में इस का प्रयोग निषिद्ध है:— “नासूचितस्य पात्रस्य प्रवेशः क्वचिदिष्यते । प्रवेशं सूचयेत्तस्मादमुख्याङ्के प्रवेशकात् ॥”