भारतकोश
नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

DevanagariHindipublished309 पृष्ठ

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( २८५ ) (ग) “सर्वत्र ल्वरां” :—संयुक्त अक्षर में ल्, व्, र् का सदा लोप हो जाता है और दूसरे अक्षर को (चाहे वह पहिले ही या पीछे) द्वित्व हो जाता है :— विप्लव से विक्कव; उज्ज्वल से उज्ज्ल । १८. 'त्य', 'थ्य' तथा 'द्य' के स्थान में क्रमशः च्च, छ् अथवा च्छ; और ज्ज हो जाता है. – नित्य से णिच्च; सत्य से सच्च; वैद्य से वेज्ज १९. ध्य और ह्य के स्थान में ज्झ हो जाता है । अध्ययन से अज्झयण इत्यादि ।

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