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नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

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( ३० ) थे ! इस की अपेक्षा नायक की वृद्धा माता में अधिक स्वाभाविकता है। ५. मित्रावसु — यह नायिका का भाई है। इसे अपनी मान प्रतिष्ठा का बहुत ध्यान है। नायक के साथ पहिली बार मिलने पर ही यह अचानक ही बात चीत आरम्भ करते हुए किसी भूमिका के बिना ही अपनी बहिन के साथ विवाह करने को कहता है। नायक को पता नहीं कि उसी की बहिन उस की प्रिया है। वह अस्वीकार कर देता है तो मित्रावसु के मान को ठेस पहुँचती है। एक बार फिर, जब नायक को यह समाचार देने लगता है कि मतङ्ग ने आप का राज्य हड़प लिया है, तो उसे अपने आप पर ग्लानि होती है कि बताने से पहिले मैं ने शत्रु को मार क्यों नहीं भगाया। वह बदला लेना चाहता है परन्तु नायक की आज्ञा के बिना कैसे ? वह बड़ा योधा है और समझता है कि मैं मतङ्ग को अकेला ही बिना किसी बड़ी सेना के मार सकता हूँ।