भारतकोश
नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

DevanagariHindipublished309 पृष्ठ

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पृष्ठ 37

( ३ ) पहिला अंक मङ्गलाचरण— "ध्यान के बहाने किस (सुन्दरी) का चिन्तन कर रहे हो ? क्षण भर आंख खोल कर कामदेव के बाणों से पीड़ित हमें देखो। रक्षक होने पर भी (हमारी) रक्षा नहीं करते ? (तो) झूठे ही दयालु (कहलाते) हो । तुम से अधिक निर्दय दूसरा मनुष्य कहां (मिलेगा) ?" इस प्रकार कामदेव की अप्सराओं द्वारा ईर्ष्या के साथ कहे गए विजयी भगवान् बुद्ध आपकी रक्षा करें ॥१॥ और भी— (जो) धनुष बाण का सन्धान करते हुए कामदेव के द्वारा, जोर से बाजे बजाकर नाचते हुए कामदेव के वीर सैनिकों के द्वारा, भ्रूविक्षेप, उत्कम्प जम्हाई, मुस्कान तथा चञ्चल नेत्रों से दिव्य अप्सराओं के द्वारा सिर झुकाते हुए सिद्धों के द्वारा, और विस्मय के कारण पुलकित शरीर वाले इन्द्र के द्वारा—ज्ञान की प्राप्ति में दत्तचित्त हो ध्यान में लगे हुए — देखे गए (वह) श्रेष्ठ मुनि, भगवान् बुद्ध, आप की रक्षा करें ॥२॥

  1. कामदेव। 2. न, नहीं।
  2. निघृण = दयाहीन। 4. विजयी (क्योंकि उन्होंने सांसारिक बन्धनों पर विजय प्राप्त कर ली थी।)
  3. नाचते हुए। 6. झुके हुए।
  4. वासव = इन्द्र।