नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
DevanagariHindipublished309 पृष्ठ
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( ३५ ) नायिका — (क्रोध के साथ) सखी, भगवती गौरी को बुरा भला मत कह । निश्चय ही आज देवी ने मुझ पर कृपा की है । चेटी — (प्रसन्नता के साथ) — राजकुमारी, तो कहो वह क्या है ? नायिका — सखी, मैं यह जानती हूँ कि आज स्वप्न में जब मैं यही वीणा बजा रही थी तो भगवती गौरी ने मुझसे कहा—" वत्से मलयवती, मैं तेरी वीणा बजाने की कुशलता और मेरे ऊपर कन्याओं के लिए कठिन तेरी इस असाधारण भक्ति से मैं प्रसन्न हूँ । अतः (कोई) विद्याधर चक्रवर्ती (राजा) शीघ्र ही तेरा पाणिग्रहण करेगा । चेटी — (प्रसन्नता के साथ) राजकुमारी ! यदि ऐसा है तो इसे स्वप्न क्यों कहती हो । निश्चय ही देवी ने तुम्हारे मन में
- निन्दा करना ।