भारतकोश
नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

DevanagariHindipublished309 पृष्ठ

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( ५७ )

नायिका— (लज्जा के साथ) सखी, तू ने खूब याद दिलाया। तो आ वहीं चलें। चेटी — राजकुमारी जी, आइए। (आगे चलती है) नायिका — (दूसरी दिशा में जाती है) चेटी — (पीछे देख कर, दुःख के साथ, मन ही मन)—आंह, इसकी बेसुधी ! क्या उसी देवी के मन्दिर को (ही) चल पड़ी है ? (प्रकट) राजकुमारी, चन्दनलतागृह तो इधर है। अतः, इधर आइए। नायिका—(लज्जित हो कर, मुस्कराते, हुए, वैसा ही करती है) चेटी— राजकुमारी ! यह चन्दनलतागृह है। इसमें प्रवेश करके, चन्द्रमणि शिलातल पर बैठकर, शान्त होइए। (दोनों बैठ जाती हैं) नायिका — (गहरी सांस लेकर, मन ही मन) भगवान् काम देव ! जिस (जीमूतवाहन) ने आपको अपने रूप की शोभा से जीत लिया


  1. घबराहट, हैरानी अथवा लज्जा के साथ।
  2. कुसुमायुध- फूलों के शस्त्रों वाला। कामदेव के पांच बाण बताए हैं जो फूलों के हैं - अरविन्द, अशोक, चूत, नवमल्लिका और नीलोत्पल।