नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary
सम्राट हर्षवर्धन द्वारा
DevanagariHindipublished309 पृष्ठ
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( ५६ ) है, उसका तो आप ने कुछ भी नहीं बिगाड़ा। परन्तु मुझ निरपराध पर अबला जानकर प्रहार करते हुए क्या आप को शर्म नहीं आती ? (अपने आप को देखकर, काम अवस्था का अभिनय करती हुई; प्रकट) सखी, घने पत्तों से सूर्य की किरणों को रोकने वाला (यह) वही चन्दनलतागृह आज मेरे गरमी के क्लेश को दूर क्यों नहीं करता ? चेटी- मैं इस सन्ताप का कारण जानती हूँ । परन्तु राजकुमारी आप तो उसे असम्भव कह कर विश्वास नहीं करेंगी । नायिका- (मन ही मन) इसने मुझे भांप ही लिया है । फिर भी पूछती हूँ। (प्रकट) सखी, वह क्या है जिसे मैं स्वीकार नहीं करूंगी ?¹ तो कह वह क्या कारण है ? चेटी- यह आप के हृदय में स्थित वर !
- मानना, स्वीकार करना ।