नारद पञ्चरात्र (भारद्वाज संहिता - वैष्णव आगम एवं प्रपत्ति-धर्म सटीक)
Narada Pancharatra Bharadwaja Samhita with Commentary
महर्षि भारद्वाज / देवर्षि नारद द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दीटीकासहित १४१ पर उसका परित्याग करना उचित मानकर बाद में उसे छोड़ते हैं और दोषों को देखकर सज्जन रहने पर भी उसी के लिये प्रायश्चित्तादि आचरण के काल में उसका परित्याग करते हैं॥८४॥ धर्मच्छद्मभृतो धर्मान् घ्नन्ति वेदपराङ्मुखाः । वैदिकाभास्तथा वेदान् कृष्णैकान्त्यपराङ्मुखाः ॥८५॥ वेद प्रतिपादित धर्म से हटकर चैत्यवन्दनादि बौद्ध धर्म का ज्ञान तथा आचरण करने (या उस पर आस्था रखने) वाले केवल धर्म का छद्म् धारण करते हुए (धार्मिक होना दिखलाते हुए) धर्मों का (ज्योतिष्टोमादि सत्रो का जो कि धर्म प्राप्ति के आधार हैं) हनन करते हैं तथा जो परमार्थतः वैदिक नहीं होकर भी अपनी वैदिक स्थिति दिखला कर वेदों का हनन करते हैं ये श्री नारायण के एकान्त्यभाव में बाधक रहने से उसके प्रतिपक्षी (ही) समझना चाहिए॥८५॥ य आत्मनां परो वेद्यस्तं विष्णुं वेदयन्ति यत् । तद्वेदानां हि वेदत्वं यस्तं वेद स वेदवित् ॥८६॥ जिनसे चेतनभूत जीवात्माओं से उत्कृष्ट ज्ञानवेद्य परमात्मरूप श्रीविष्णु का ब्रह्मरूप में ज्ञान प्राप्त हो यही वेदों की सत्ज्ञानवत्ता है तथा जो वेदों के अनुशीलन से इसी रहस्यभूत ज्ञान की प्राप्ति करे वही वेदवेत्ता है। तथा इससे भिन्न तत्वों के विज्ञाता वेद के वेत्ता नहीं वे वेदविद्यघातक हैं॥८६॥ दर्शयन्त इव श्रेयो विप्लुतैर्हेतुभिर्बलात् । च्यावयन्ति श्रुतिपथात् दूरं बाह्याः स्थिरानपि ॥८७॥ हेतुवादिक अवैष्णव व कुदृष्टि रखनेवाला विद्वान् (बौद्धादि दार्शनिक) स्खलनशील हेत्वाभास जैसे हेतुओं को अपने बुद्धिबल से श्रेयस्कारी दिखलाते हुए स्थित श्रद्धाभक्तिवाले बुधजन को भी स्थिर सिद्धान्तवाले वेदमार्ग से दूर हटाकर वे उन्हें अपथगामी बना देते हैं॥८७॥ वैदिका इव चाप्यन्ये दर्शयन्तोऽन्यथा श्रुतेः । अर्थमच्युतकैङ्कर्याच्च्यावयन्ति कुदृष्टयः ॥८८॥ कुछ विद्वान् वेद का अनुगमन करनेवाले होने से वेद के आशयों को अपनी तार्किक बुद्धि के बल से अन्यरूपों में दिखलाने वाले कुदृष्टि होकर अच्युत के कैङ्कर्यभाव से दृढ़भक्ति वैष्णवों को भी भटका देते हैं॥८८॥ तस्मात् कुदृष्टिभिर्बाह्यैरप्रकम्प्यो गतव्यथः । ऐकान्त्यममलं विष्णोरातिष्ठेत् परमं सुधीः ॥८९॥ अतएव बुद्धिमान् स्थिर भक्तिवाला एकान्ती बाह्यजन की ऐसी हेतु प्रदर्शन तार्किक ६