नारद पञ्चरात्र (भारद्वाज संहिता - वैष्णव आगम एवं प्रपत्ति-धर्म सटीक)
Narada Pancharatra Bharadwaja Samhita with Commentary
महर्षि भारद्वाज / देवर्षि नारद द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दीटीकासहित ३७ मन्त्रं नियतमग्र्याणां सो हीनाय प्रयच्छति । स वै हीनगुरुर्निन्द्यस्तेन सार्द्धं पतत्यधः ॥५५॥ अग्रजात त्रैवर्णिक द्विजों के लिये शास्त्रों में मान्य तथा नियत वैदिक मन्त्रों को जो हीन या शूद्रादिवर्णों को दीक्षा प्रदान करते हुए देते हैं वे हीन गुरु होकर निन्दनीय स्थिति को प्राप्त कर साधक शिष्य के साथ ही नरक में जाते हैं। (अतः शूद्रादि जातियों को तान्त्रिक मन्त्र ही साधना के लिये उपयुक्त हैं।)॥५५॥ तदेवं स्वोचितैरेव मन्त्रैर्मन्त्रविदाश्रयाः । श्रयेयुः शरणं सर्वे सर्वभूतेश्वरं हरिम् ॥५६॥ अतएव मन्त्रवेत्ता गुरु का आश्रय लेकर अपने लिये नियत मन्त्रों को ग्रहण करते हुए सभी प्राणियों के अधिपति श्री¹विष्णु की प्रपत्ति के द्वारा उनकी धारणा प्राप्त करना चाहिए॥५६॥ पुण्येऽनुकूले समये देशे भागवते शुभे । निमज्ज्य नियतस्तीर्थे प्रणिपत्याश्रयेद् गुरुम् ॥५७॥ इसकी दीक्षा लेने वाला साधक भक्त किसी उत्तम अनुकूल तथा पुण्यशाली दिवस या तिथि को तथा शुभदाता भागवत तीर्थ या प्रदेश में संयमित मन के साथ सर्वप्रथम पवित्र भाव से नियत तीर्थ में स्नान करें तथा फिर गुरु का सान्निध्य प्राप्त कर उन्हें आचारानुरूप प्रणाम करें॥५७॥ आचार्यश्चोपसन्नाय भक्त्याभ्यर्च्य जनार्दनम् । गुरून् प्रणम्य मन्त्रेण प्रपत्तिं प्रतिपादयेत् ॥५८॥ तब दीक्षा प्रदान करने के पूर्व मन्त्रदाता आचार्य उस शिष्य के शरण आने पर अपने इष्टदेव श्रीमहाविष्णु का सर्वप्रथम पूजन करें तथा बाद में अपने पूज्य गुरु को प्रणाम कर गुरुपरम्परा पूर्वक मन्त्र को उस समीपवर्ती शिष्य को मन्त्र दीक्षा देकर 'प्रपत्ति' या न्यास योग को सम्पादित करें॥५८॥ अथ स्त्रीशूद्रसङ्कीर्णानिर्मला पतितादिषु । अनन्येनान्यदृष्टौ च कृतापि न कृता भवेत् ॥५९॥ और जो स्त्री, शूद्र तथा अनुलोम प्रतिलोम जातियां (संकीर्ण) हैं, जो आचार्य के आश्रय-ग्रहण से हीन है तथा जो महापातकादि से युक्त हैं वे यदि केवल शास्त्रमात्र से सम्पादित ज्ञानवाले किसी भी आचार्य को गुरु के रूप में प्राप्त कर उनसे न्यास या प्रपत्ति की १ यहाँ कारिका में प्रयुक्त 'सर्वभूतेश्वर' पद का आशय है कि श्रीविष्णु सभी प्राणियों के शरण दाता हैं अतः सभी उनकी प्रपत्ति का अधिकार रखते हैं।