नारद पञ्चरात्र (भारद्वाज संहिता - वैष्णव आगम एवं प्रपत्ति-धर्म सटीक)

नारद पञ्चरात्र (भारद्वाज संहिता - वैष्णव आगम एवं प्रपत्ति-धर्म सटीक)
Narada Pancharatra Bharadwaja Samhita with Commentary
महर्षि भारद्वाज / देवर्षि नारद द्वारा
DevanagariHindipublished176 पृष्ठ
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हिन्दीटीकासहित ४७ अथ द्वितीयोऽध्यायः अथानानुकूल्यमुख्यानि प्रपत्त्यङ्गानि विस्तरात् । धर्माणां तद्विरुद्धानां स्वरूपञ्च निबोधत ॥१॥ इति श्रीनारदपञ्चरात्रे भारद्वाजसंहितायां द्वितीयोऽध्यायः ॥२॥ अपने आराध्य इष्ट देव की अनुकूलता के लिये मुख्यरूप या स्थिति धारण करने वाले प्रपत्ति के अङ्गों का उसकें धर्मों का तथा प्रपत्ति के विरुद्ध धर्मों का अब विस्तार से स्वरूप तथा विवरण बतलाता हूं जिसे ध्यान देकर सुनिये।।१।। (इस द्वितीयाध्याय के आगे का विवरण देने वाला मूल भाग उपलब्ध नहीं हैं। ऐसा लगता है कि यह विच्छिन्न हो चुका है।) इति प्रपत्ति धर्मादिनिरूपणात्मकों द्वितीयोऽध्यायः ॥२॥