भारतकोश
नारद पञ्चरात्र (भारद्वाज संहिता - वैष्णव आगम एवं प्रपत्ति-धर्म सटीक)

नारद पञ्चरात्र (भारद्वाज संहिता - वैष्णव आगम एवं प्रपत्ति-धर्म सटीक)

Narada Pancharatra Bharadwaja Samhita with Commentary

महर्षि भारद्वाज / देवर्षि नारद द्वारा

DevanagariHindipublished176 पृष्ठ

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पृष्ठ 89

हिन्दीटीकासहित ८७ श्रुत्वादौ नारदात् सम्यग्भारद्वाजोऽर्थसङ्ग्रहम् । महतीं संहितामेता चकार मुनिचोदितः ॥९९॥ प्रथम वार श्री देवर्षि नारद से पञ्चरात्र आगम के अर्थों का श्रवण कर बाद में नारदमुनि की (ही) प्रेरणा से इस विस्तीर्ण संहिता की मैंने रचना की॥९९॥ यश्चेमां संहितां पुण्यां शृणुयाच्छ्रावयेत वा । स मुक्तः सर्वपापेभ्यः सर्वकामान् समश्नुते ॥१००॥ इति श्रीनारदपञ्चरात्रे भारद्वाजसंहितायां न्यासोपदेशो नाम चतुर्थोऽध्यायः ॥४॥ अतएव जो इस पुण्यदात्री तथा सभी पातकों को दूर करनेवाली भारद्वाज प्रोक्त संहिता का नियतमन से वह श्रवण करता है, वह सद्यः सभी पातकों से मुक्त होकर सभी इच्छाओं (कामनाओं) की प्राप्ति करेगा॥१००॥ नारदपञ्चरात्र की भारद्वाजसंहिता में न्यासोपदेश नामक चतुर्थाध्याय की तत्वप्रकाशिका नामक हिन्दी व्याख्या समाप्त