भारतकोश
संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished770 पृष्ठ

पृष्ठ 506, कुल 770 में से

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पृष्ठ 506

५०४ * संक्षिप्त नारदपुराण *


७३. वेदान्तवेद्यः= उपनिषदोंद्वारा जानने योग्य परमात्मा, ७४. ब्रह्मस्थः= वेदमें स्थित, ७५. प्रजापतिः= सम्पूर्ण जीवोंके पालक, ७६. अमोघदृक्= जिनकी दृष्टि कभी चूकती नहीं ऐसे सर्वसाक्षी, ७७. गोपीकरावलम्बी= गोपियोंके हाथको पकड़कर नाचनेवाले, ७८. गोपबालकसुप्रियः= गोपबालकोंके अत्यन्त प्रियतम।

७९. बलानुयायी= बलरामजीका अनुकरण करनेवाले, ८०. बलवान्= बली, ८१. श्रीदामप्रियः= श्रीदामाके प्रिय सखा, ८२. आत्मवान्= मनको वशमें करनेवाले, ८३. गोपीगृहाङ्गणरतिः= गोपियोंके घर और आँगनमें खेलनेवाले, ८४. भद्रः= कल्याणस्वरूप, ८५. सुश्लोकमङ्गलः= अपने लोकपावन सुयशसे सबका मङ्गल करनेवाले।

८६. नवनीतहरः= माखनका हरण करनेवाले, ८७. बालः= बाल्यावस्थासे विभूषित, ८८. नवनीतप्रियाशनः= मक्खन जिनका प्यारा भोजन है, ८९. बालवृन्दी= गोप-बालकोंके समुदायको साथ रखनेवाले, ९०. मर्कवृन्दी= वानरोंके झुंडके साथ खेलनेवाले, ९१. चकिताक्षः= आश्चर्ययुक्त चञ्चल नेत्रोंसे देखनेवाले, ९२. पलायितः= मैयाकी साँटीके भयसे भाग जानेवाले।

९३. यशोदातर्जितः= यशोदा मैयाकी डाँट सहनेवाले, ९४. कम्पी= मैया मारेगी इस भयसे काँपनेवाले, ९५. मायारुदितशोभनः= लीलाकृत रुदनसे सुशोभित, ९६. दामोदरः= मैयाद्वारा रस्सीसे कमरमें बाँधे जानेवाले, ९७. अप्रमेयात्मा= जिसकी कोई माप नहीं ऐसे स्वरूपसे युक्त, ९८. दयालुः= सबपर दया करनेवाले, ९९. भक्तवत्सलः= भक्तोंसे प्यार करनेवाले।

१००. उलूखले सुबद्धः= ऊखलमें अच्छी तरह बँधे हुए, १०१. नम्रशिरा= झुके मस्तकवाले, १०२. गोपीकदर्थितः= गोपियोंद्वारा यशोदा मैयाके पास जिनके बालचापल्यकी शिकायत की गयी है वे, १०३. वृक्षभङ्गी= यमलार्जुन नामक वृक्षोंको भङ्ग करनेवाले, १०४. शोकभङ्गी= स्वयं सुरक्षित रहकर स्वजनोंका शोक भङ्ग करनेवाले, १०५. धनदात्मजमोक्षणः= कुबेरपुत्रोंका उद्धार करनेवाले।

१०६. देवर्षिवचनश्लाघी= देवर्षि नारदके वचनका आदर करनेवाले, १०७. भक्तवात्सल्यसागरः= भक्तवत्सलताके समुद्र, १०८. व्रजकोलाहलकरः= अपनी बालोचित क्रीड़ाओंसे व्रजमें कोलाहल मचा देनेवाले, १०९. व्रजानन्दविवर्धनः= व्रजवासियोंके आनन्दकी वृद्धि करनेवाले।

११०. गोपात्मा= गोपस्वरूप, १११. प्रेरकः= इन्द्रिय, मन, बुद्धि आदिको प्रेरणा देनेवाले, ११२. साक्षी= अनन्त विश्वके सम्पूर्ण पदार्थों और भावोंके द्रष्टा, ११३. वृन्दावननिवासकृत्= वृन्दावनमें निवास करनेवाले, ११४. वत्सपालः= बछड़ोंको पालनेवाले, ११५. वत्सपतिः= बछड़ोंके स्वामी एवं रक्षक, ११६. गोपदारकमण्डनः= गोपबालकोंकी मण्डलीको सुशोभित करनेवाले।

११७. बालक्रीडः= बालोचित खेल खेलनेवाले, ११८. बालरतिः= गोपबालकोंसे प्रेम करनेवाले, ११९. बालकः= बालरूपधारी गोपाल, १२०. कनकाङ्गदी= सोनेका बाजूबंद पहननेवाले, १२१. पीताम्बरः= पीताम्बर पहननेवाले, १२२. हेममाली= सुवर्णमालाधारी, १२३. मणिमुक्ताविभूषणः= मणियों और मोतियोंके आभूषण धारण करनेवाले।

१२४. किङ्किणीकटकौ= कटिमें क्षुद्र घण्टिका और हाथोंमें कड़े पहननेवाले, १२५. सूत्री= बाल्यावस्थामें सूतकी करधनी और बड़े होनेपर यज्ञोपवीत धारण करनेवाले; १२६. नूपुरी= पैरोंमें नूपुर पहननेवाले, १२७. मुद्रिकान्वितः= हाथकी अंगुलियोंमें अंगूठी धारण करनेवाले, १२८. वत्सासुरप्रतिध्वंसी= वत्सासुरका विनाश