भारतकोश
संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished770 पृष्ठ

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पृष्ठ 508
५०६* संक्षिप्त नारदपुराण *

व्योमासुरका नाश करनेवाले, १७९. केशिकण्ठविदारकः=केशीका कण्ठ विदीर्ण करनेवाले, १८०. गोपगोप्ता=ग्वालोंके रक्षक, १८१. दावाग्निपरिशोषकः=दावानलका शोषण करनेवाले।

१८२. गोपकन्यावस्त्रहारी=गोपकुमारियोंके चीर हरण करनेवाले, १८३. गोपकन्यावरप्रदः=गोपकन्याओंको वर देनेवाले, १८४. यज्ञपत्न्यन्नभोजी=यज्ञपत्नियोंके अन्न भोजन करनेवाले, १८५. मुनिमानापहारकः=अपनेको मुनि माननेवाले ब्राह्मणोंके अभिमानको दूर करनेवाले।

१८६. जलेशमानमथनः=जलके स्वामी वरुणका मान मर्दन करनेवाले, १८७. नन्दगोपालजीवनः=अजगरसे छुड़ाकर नन्दगोपको जीवन देनेवाले, १८८. गन्धर्वशापमोक्ता=अजगररूपमें आये हुए गन्धर्व (विद्याधर)-को शापसे छुड़ानेवाले, १८९. शङ्खचूडशिरोहरः=शङ्खचूड नामक गुह्यकका मस्तक काट लेनेवाले।

१९०. वंशीवटी=वंशीवटके समीप लीला करनेवाले, १९१. वेणुवादी=वंशी बजानेवाले, १९२. गोपीचिन्तापहारकः=गोपियोंकी चिन्ताको दूर करनेवाले, १९३. सर्वगोप्ता=सबके रक्षक, १९४. समाह्वानः=सबके द्वारा पुकारे जानेवाले, १९५. सर्वगोपीमनोरथः=सम्पूर्ण गोपाङ्गनाओंके अभीष्ट।

१९६. व्यङ्ग्यधर्मप्रवक्ता=व्यङ्ग्योक्तिद्वारा धर्मका उपदेश देनेवाले, १९७. गोपीमण्डलमोहनः=गोपसुन्दरियोंके समुदायको मोहित करनेवाले, १९८. रासक्रीडारसास्वादी=रासक्रीडाके रसका आस्वादन करनेवाले, १९९. रसिकः=रसका अनुभव करनेवाले, २००. राधिकाधवः=श्रीराधाके प्राणनाथ।

२०१. किशोरीप्राणनाथः=श्रीकिशोरीजीके प्राणवल्लभ, २०२. वृषभानुसुताप्रियः=वृषभानु-नन्दिनीके प्यारे, २०३. सर्वगोपीजनानन्दी=सम्पूर्ण गोपीजनोंको आनन्द देनेवाले, २०४. गोपीजन-विमोहनः=गोपाङ्गनाओंके मनको मोह लेनेवाले।

२०५. गोपिकागीतचरितः=गोपाङ्गनाओंद्वारा गाये हुए पावन चरित्रवाले, २०६. गोपीनर्तनलालसः=गोपियोंके रासनृत्यकी अभिलाषा रखनेवाले, २०७. गोपीस्कन्धाश्रितकरः=गोपीके कंधेपर हाथ रखकर चलनेवाले, २०८. गोपिकाचुम्बनप्रियः=यशोदा आदि मातृस्थानीया वात्सल्यवती गोपियोंके द्वारा किया जानेवाला मुखचुम्बन जिन्हें प्रिय है वे श्यामसुन्दर।

२०९. गोपिकामार्जितमुखः=गोपाङ्गनाएँ अपने अञ्चलसे जिनका मुख पोंछती हैं वे, २१०. गोपीव्यजनवीजितः=गोपियाँ जिन्हें पंखा डुलाकर आराम पहुँचाती हैं वे, २११. गोपिकाकेशसंस्कारी=गोपिकाके केशोंको सँवारनेवाले, २१२. गोपिकापुष्पसंस्तरः=गोपिकाका फूलोंसे शृङ्गार करनेवाले।

२१३. गोपिकाहृदयालम्बी=गोपीके हृदयका आश्रय लेनेवाले, २१४. गोपीवहनतत्परः=गोपी (श्रीराधा)-को कंधेपर बिठाकर ढोनेके लिये प्रस्तुत, २१५. गोपिकामदहारी=गोपाङ्गनाओंके अभिमानको चूर्ण करनेवाले, २१६. गोपिकापरमार्जितः=गोपाङ्गनाओंको परम फलके रूपमें प्राप्त।

२१७. गोपिकाकृतसल्लीलः=रासलीलामें अन्तर्धान हो जानेपर गोपिकाओंने जिनकी पवित्र लीलाओंका अनुकरण किया था वे श्रीकृष्ण, २१८. गोपिकासंस्मृतप्रियः=गोपिकाओंद्वारा निरन्तर चिन्तन किये जानेवाले प्रियतम, २१९. गोपिकावन्दितपदः=गोपाङ्गनाओंद्वारा वन्दित चरणोंवाले, २२०. गोपिकावशवर्तनः=गोपसुन्दरियोंके वशमें रहनेवाले।

२२१. राधापराजितः=श्रीराधारानीसे हार मान लेनेवाले, २२२. श्रीमान्=शोभाशाली,