संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण
Sankshipt Narada Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished770 पृष्ठ
पृष्ठ 509, कुल 770 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 509
- पूर्वभाग-तृतीय पाद * | ५०७ ---|---
| २२३. निकुञ्जेसुविहारवान्=वृन्दावनके कुञ्जमें सुन्दर लीला करनेवाले, २२४. कुञ्जप्रियः=निकुञ्जके प्रेमी, २२५. कुञ्जवासी=कुञ्जमें निवास करनेवाले, २२६. वृन्दावनविकाशनः=वृन्दावनको प्रकाशित करनेवाले।<br><br>२२७. यमुनाजलसिक्ताङ्गः=यमुनाजीके जलसे अभिषिक्त अङ्गोंवाले, २२८. यमुनासौख्यदायकः=यमुनाजीको सुख देनेवाले, २२९. शशिसंस्तम्भनः=रासलीलाकी रात्रिमें चन्द्रमाकी गतिको रोक देनेवाले, २३०. शूरः=अखण्ड शौर्यसम्पन्न, २३१. कामी=प्रेमी भक्तोंसे मिलनेकी कामनावाले, २३२. कामविमोहनः=अपनी दिव्य लीलाओंसे कामदेवको विमोहित कर देनेवाले।<br><br>२३३. कामाद्यः=कामदेवके आदिकारण, २३४. कामनाथः=कामके स्वामी, २३५. काममानसभेदनः=कामदेवके भी हृदयका भेदन करनेवाले, २३६. कामदः=इच्छानुरूप भोग देनेवाले, २३७. कामरूपः=भक्तजनोंकी कामनाके अनुरूप रूप धारण करनेवाले, २३८. कामिनीकामसंचयः=गोपकामिनीयोंके प्रेमका संग्रह करनेवाले।<br><br>२३९. नित्यक्रीडः=नित्य खेल करनेवाले, २४०. महालीलः=महती लीला करनेवाले, २४१. सर्वः=सर्वस्वरूप, २४२. सर्वगतः=सर्वत्र व्यापक, २४३. परमात्मा=परब्रह्मस्वरूप, २४४. पराधीशः=परमेश्वर, २४५. सर्वकारणकारणः=समस्त कारणोंके भी कारण।<br><br>२४६. गृहीतनारदवचाः=नारदजीके वचन माननेवाले, २४७. अक्रूरपरिचिन्तितः=ब्रजमें जाते हुए अक्रूरजीके द्वारा मार्गमें जिनका विशेषरूपसे चिन्तन किया गया, वे श्रीकृष्ण, २४८. अक्रूरवन्दितपदः=अक्रूरजीके द्वारा वन्दित चरणोंवाले, २४९. गोपिकातोषकारकः=भावी विरहसे व्याकुल हुई गोपाङ्गनाओंको सान्त्वना देनेवाले। | २५०. अक्रूरवाक्यसंग्राही=अक्रूरजीके वचनोंको स्वीकार करनेवाले, २५१. मथुरावासकारणः=मथुरामें निवास करनेवाले, २५२. अक्रूरतापशमनः=अक्रूरजीका दुःख दूर करनेवाले, २५३. रजकायुः-प्रणाशनः=कंसके धोबीकी आयुको नष्ट करनेवाले।<br><br>२५४. मथुरानन्ददायी=मथुरावासियोंको आनन्द देनेवाले, २५५. कंसवस्त्रविलुण्ठनः=कंसके कपड़ोंको लूट लेनेवाले, २५६. कंसवस्त्रपरीधानः=कंसके वस्त्र पहननेवाले, २५७. गोपवस्त्रप्रदायकः=ग्वालबालोंको वस्त्र देनेवाले।<br><br>२५८. सुदामगृहगामी=सुदामा मालीके घर जानेवाले, २५९. सुदामपरिपूजितः=सुदामा मालीके द्वारा पूजित, २६०. तन्तुवायकसम्प्रीतः=दर्जीके ऊपर प्रसन्न, २६१. कुब्जाचन्दनलेपनः=कुब्जाके घिसे हुए चन्दनको अपने श्रीअङ्गोंमें लगानेवाले।<br><br>२६२. कुब्जारूपप्रदः=कुब्जाको सुन्दर रूप देनेवाले, २६३. विज्ञः=विशिष्ट ज्ञानवान्, २६४. मुकुन्दः=मोक्ष देनेवाले, २६५. विष्टरश्रवाः=विस्तृत सुयश एवं कानोंवाले, २६६. सर्वज्ञः=सब कुछ जाननेवाले, २६७. मधुरालोकी=मथुरानगरीका दर्शन करनेवाले, २६८. सर्वलोकाभिनन्दनः=सब लोगोंसे अभिनन्दन (सम्मान) पानेवाले।<br><br>२६९. कृपाकटाक्षदर्शी=कृपापूर्ण कटाक्षसे सबकी ओर देखनेवाले, २७०. दैत्यारिः=दैत्योंके शत्रु, २७१. देवपालकः=देवताओंके रक्षक, २७२. सर्वदुःखप्रशमनः=सबके सम्पूर्ण दुःखोंका नाश करनेवाले, २७३. धनुर्भङ्गी=धनुष तोड़नेवाले, २७४. महोत्सवः=महान् उत्सवरूप।<br><br>२७५. कुवलयापीडहन्ता=कुवलयापीड नामक हाथीका वध करनेवाले, २७६. दन्तस्कन्धः=हाथीके तोड़े हुए दाँतोंको कंधेपर धारण करनेवाले, २७७. बलाग्रणी=बलरामजीको आगे करके चलनेवाले, २७८. कल्पस्वरूपधरः=विभिन्न लोगोंके |