संक्षिप्त नारद पुराण
Sankshipt Narada Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
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- संक्षिप्त नारदपुराण *
लिये उनकी भावनाके अनुसार रूप धारण करनेवाले, २७९. धीरः=अविचल धैर्यसे सम्पन्न, २८०. दिव्यवस्त्रानुलेपनः=दिव्य वस्त्र तथा दिव्य अङ्गराग धारण करनेवाले।
२८१. मल्लरूपः=कंसके अखाड़ेमें पहलवानके रूपमें उपस्थित, २८२. महाकालः=महान् कालरूप, २८३. कामरूपी=इच्छानुसार रूप धारण करनेवाले, २८४. बलान्वितः=अनन्त बलसम्पन्न, २८५. कंसत्रासकरः=कंसको भयभीत कर देनेवाले, २८६. भीमः=कंसके लिये भयंकर, २८७. मुष्टिकान्तः=बलभद्ररूपसे मुष्टिकके जीवनका अन्त कर देनेवाले, २८८. कंसहा=कंसका वध करनेवाले।
२८९. चाणूरघ्नः=चाणूरका नाश करनेवाले, २९०. भयहरः=भय हर लेनेवाले, २९१. शलारिः=शलके शत्रु, २९२. तोशलान्तकः=तोशलका अन्त करनेवाले, २९३. वैकुण्ठवासी=विष्णुरूपसे वैकुण्ठधाममें निवास करनेवाले, २९४. कंसारिः=कंसके शत्रु, २९५. सर्वदुष्टनिषूदनः=सब दुष्टोंका संहार करनेवाले।
२९६. देवदुन्दुभिनिर्घोषी=देव-दुन्दुभिघोषके कारण, २९७. पितृशोकनिवारणः=पिता-माता (वसुदेव-देवकी)-का शोक दूर करनेवाले, २९८. यादवेन्द्रः=यदुकुलके स्वामी, २९९. सतां नाथः=सत्पुरुषोंके रक्षक, ३००. यादवारिप्रमर्दनः=यादवोंके शत्रुओंका मर्दन करनेवाले।
३०१. शौरिशोकविनाशी=वसुदेवजीके शोकका नाश करनेवाले, ३०२. देवकीतापनाशनः=देवकीका संताप नष्ट करनेवाले, ३०३. उग्रसेनपरित्राता=उग्रसेनके रक्षक, ३०४. उग्रसेनाभिपूजितः=उग्रसेनद्वारा पूजित।
३०५. उग्रसेनाभिषेकी=उग्रसेनका राज्याभिषेक करनेवाले, ३०६. उग्रसेनदयापरः=उग्रसेनके प्रति दयाभाव बनाये रखनेवाले, ३०७. सर्वसात्वतसाक्षी=सम्पूर्ण यदुवंशियोंकी देख-भाल करनेवाले, ३०८. यदूनामभिनन्दनः=यदुवंशियोंको आनन्दित करनेवाले।
३०९. सर्वमाथुरसंसेव्यः=सम्पूर्ण मथुरावासियोंद्वारा सेवन करने योग्य, ३१०. करुणः=दयालु, ३११. भक्तबान्धवः=भक्तोंके भाई-बन्धु, ३१२. सर्वगोपालधनदः=सम्पूर्ण ग्वालोंको धन देनेवाले, ३१३. गोपीगोपाललालसः=गोपियों और ग्वालोंसे मिलनेके लिये उत्सुक रहनेवाले।
३१४. शौरिदत्तोपवीती=वसुदेवजीके द्वारा उपनयन-संस्कारमें दिये हुए यज्ञोपवीतको धारण करनेवाले, ३१५. उग्रसेनदयाकरः=उग्रसेनपर दया करनेवाले, ३१६. गुरुभक्तः=गुरु सान्दीपतिके प्रति भक्तिभावसे युक्त, ३१७. ब्रह्मचारी=गुरुकुलमें रहकर ब्रह्मचर्यका पालन करनेवाले, ३१८. निगमाध्ययने रतः=वेदाध्ययनपरायण।
३१९. संकर्षणसहाध्यायी=बलरामजीके सहपाठी, ३२०. सुदामसुहृत्=सुदामा ब्राह्मणके सखा, ३२१. विद्यानिधिः=विद्याके भण्डार, ३२२. कलाकोषः= सम्पूर्ण कलाओंके कोषागार, ३२३. मृतपुत्रप्रदः= मरे हुए गुरुपुत्रोंको यमलोकसे जीवित लाकर गुरुकी सेवामें अर्पित करनेवाले।
३२४. चक्री=सुदर्शन चक्रधारी, ३२५. पाञ्चजनी=पाञ्चजन्य शङ्ख धारण करनेवाले, ३२६. सर्वनारकिमोचनः=सम्पूर्ण नरकवासियोंका उद्धार करनेवाले, ३२७. यमार्चितः=यमराजद्वारा पूजित, ३२८. परः=सर्वोत्कृष्ट, ३२९. देवः=द्युतिमान्, ३३०. नामोच्चारवशः=अपने नामके उच्चारणमात्रसे वशमें हो जानेवाले, ३३१. अच्युतः=अपनी महिमासे कभी च्युत न होनेवाले।
३३२. कुब्जाविलासी=कुब्जाके कुबड़ेपनको मिटानेकी लीला करनेवाले, ३३३. सुभगः=पूर्ण सौभाग्यशाली, ३३४. दीनबन्धुः=दीन-दुःखियों