भारतकोश
संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished770 पृष्ठ

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पृष्ठ 511
  • पूर्वभाग-तृतीय पाद * ५०९

और असहायोंके बन्धु, ३३५. अनूपमः=जिनके समान दूसरा कोई नहीं, ३३६. अक्रूरगृहगोप्ताः=अक्रूरके गृहकी रक्षा करनेवाले, ३३७. प्रतिज्ञापालकः=प्रतिज्ञाका पालन करनेवाले, ३३८. शुभः=शुभस्वरूप।

३३९. जरासन्धजयी=सत्रह बार जरासन्धको जीतनेवाले, ३४०. विद्वान्=सर्वज्ञ, ३४१. यवनान्तः=कालयवनका अन्त करनेवाले, ३४२. द्विजाश्रयः=द्विजोंके आश्रय, ३४३. मुचुकुन्दप्रियकरः=मुचुकुन्दका प्रिय करनेवाले, ३४४. जरासन्धपलायितः=अठारहवीं बारके युद्धमें जरासन्धके सामनेसे युद्ध छोड़कर भाग जानेवाले।

३४५. द्वारकाजनकः=द्वारकापुरीको प्रकट करनेवाले, ३४६. गूढः=मानवरूपमें छिपे हुए परमात्मा, ३४७. ब्रह्मण्यः=ब्राह्मणभक्त, ३४८. सत्यसंगरः=सत्यप्रतिज्ञ, ३४९. लीलाधरः=लीलाधारी, ३५०. प्रियकरः= सबका प्रिय करनेवाले, ३५१. विश्वकर्मा=बहुत प्रकारके कर्म करनेवाले, ३५२. यशप्रदः=दूसरोंको यश देनेवाले।

३५३. रुक्मिणीप्रियसंदेशः=रुक्मिणीको प्रिय संदेश देनेवाले, ३५४. रुक्मिशोकविवर्धनः=रुक्मीका शोक बढ़ानेवाले, ३५५. चैद्यशोकालयः=शिशुपालके लिये शोकके भण्डार, ३५६. श्रेष्ठः=उत्तम गुणसम्पन्न, ३५७. दुष्टराजन्यनाशनः=दुष्ट राजाओंका नाश करनेवाले।

३५८. रुक्मिवैरूप्यकरणः=रुक्मीके आधे बाल मुड़ाकर उसे कुरूप बना देनेवाले, ३५९. रुक्मिणीवचने रतः=रुक्मिणीके वचनका पालन करनेमें तत्पर, ३६०. बलभद्रवचोग्राही=बलभद्रजीकी आज्ञा माननेवाले, ३६१. मुक्तरुक्मी=रुक्मीको जीवित छोड़ देनेवाले, ३६२. जनार्दनः=भक्तोंद्वारा याचित।

३६३. रुक्मिणीप्राणनाथः=रुक्मिणीके प्राणवल्लभ, ३६४. सत्यभामापतिः=सत्यभामाके स्वामी, ३६५. स्वयं भक्तपक्षी=स्वयं ही भक्तोंका पक्ष लेनेवाले, ३६६. भक्तिवश्यः=भक्तिसे वशमें हो जानेवाले, ३६७. अक्रूरमणिदायकः=अक्रूरजीको स्यमन्तकमणि देनेवाले।

३६८. शतधन्वप्राणहारी=शतधन्वाके प्राण लेनेवाले, ३६९. ऋक्षराजसुताप्रियः=रीछोंके राजा जाम्बवान्की पुत्रीके प्रियतम पति, ३७०. सत्राजित्तनयाकान्तः=सत्राजित्की सुपुत्री सत्यभामाके प्राणवल्लभ, ३७१. मित्रविन्दापहारकः=मित्रविन्दाका अपहरण करनेवाले।

३७२. सत्यापतिः=नग्नजित्की पुत्री सत्याके स्वामी, ३७३. लक्ष्मणाजित्=स्वयंवरमें लक्ष्मणाको जीतनेवाले, ३७४. पूज्यः=पूजाके योग्य, ३७५. भद्राप्रियङ्करः=भद्राका प्रिय करनेवाले, ३७६. नरकासुरघाती=नरकासुरका वध करनेवाले, ३७७. लीलाकन्याहरः=लीलापूर्वक षोडश सहस्र कन्याओंको नरकासुरकी कैदसे छुड़ाकर अपने साथ ले जानेवाले, ३७८. जयी=विजयशील।

३७९. मुरारिः=मुर दैत्यका नाश करनेवाले, ३८०. मदनेशः=कामदेवपर भी शासन करनेवाले, ३८१. धरित्रीदुःखनाशनः=धरतीका दुःख दूर करनेवाले, ३८२. वैनतेयी=गरुड़के स्वामी, ३८३. स्वर्गगामी=पारिजातके लिये स्वर्गलोककी यात्रा करनेवाले, ३८४. अदित्याः कुण्डलप्रदः=अदितिको कुण्डल देनेवाले।

३८५. इन्द्रार्चितः=इन्द्रके द्वारा पूजित, ३८६. रमाकान्तः=लक्ष्मीके प्रियतम, ३८७. वज्रिभार्याप्रपूजितः=इन्द्रपत्नी शचीके द्वारा पूजित, ३८८. पारिजातापहारी=पारिजात वृक्षका अपहरण करनेवाले, ३८९. शक्रमानापहारकः=इन्द्रका अभिमान चूर्ण करनेवाले।

३९०. प्रद्युम्नजनकः=प्रद्युम्नके पिता, ३९१. साम्बतातः=साम्बके पिता, ३९२. बहुसुतः=अधिक पुत्रोंवाले, ३९३. विधुः=विष्णुस्वरूप,

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