संक्षिप्त नारद पुराण
Sankshipt Narada Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 761, कुल 770 में से
संदर्भ में पढ़ें- उत्तरभाग * ७५९
महावन है, जो भगवान् श्रीहरिको सदैव प्रिय है; उसका भक्तिपूर्वक दर्शन करके मनुष्य इन्द्रलोकमें आदर पाता है। नवाँ लोहजङ्घवन है, जहाँ स्नान करके मनुष्य भगवान् महाविष्णुके प्रसादसे भोग और मोक्ष पाता है। दसवाँ बिल्ववन है, जहाँ स्नान करनेवाला मनुष्य अपनी इच्छाके अनुसार शिवलोक अथवा विष्णुलोकमें जाता है। ग्यारहवाँ भाण्डीरवन है, जो योगियोंको अत्यन्त प्रिय है; वहाँ भक्तिपूर्वक स्नान करनेवाला मनुष्य सब पापोंसे छूट जाता है। बारहवाँ वृन्दावन है, जो समस्त पापोंका उच्छेद करनेवाला है। सती मोहिनि ! इस पृथ्वीपर उसके समान दूसरा कोई वन नहीं है। वहाँ स्नान करनेवाला मानव देवताओं, ऋषियों तथा पितरोंका तर्पण करके तीनों ऋणोंसे मुक्त हो विष्णुलोकमें प्रतिष्ठित होता है।
मथुरा-मण्डलका विस्तार बीस योजन है; उसमें जहाँ-कहीं भी स्नान करनेवाला पुरुष भगवान् विष्णुकी भक्ति पाता है। उसके मध्यभागमें मथुरा नामकी पुरी है, जो सर्वोत्तम पुरियोंसे भी उत्तम है; जिसके दर्शनमात्रसे मनुष्य भगवान् माधवकी भक्ति प्राप्त कर लेता है। नरेश्वरि ! वहाँ विश्रान्ति (विश्रामघाट) नामसे प्रसिद्ध एक तीर्थरत्न है, जिसमें भक्तिपूर्वक स्नान करनेवाला मानव विष्णुधाममें जाता है। विश्रामघाटसे दक्षिण उसके पास ही विमुक्त नामका उत्तम तीर्थ है, जहाँ भक्तिपूर्वक स्नान करनेपर मनुष्य निश्चय ही मोक्ष पाता है। वहाँसे दक्षिण भागमें रामतीर्थ है, जहाँ स्नान करनेवाला मनुष्य अज्ञानबन्धनसे अवश्य मुक्त हो जाता है। वहाँसे दक्षिण संसारमोक्षण नामक उत्तम तीर्थ है, उसमें स्नान करके मनुष्य विष्णुलोकमें सम्मानित होता है। उससे दक्षिण भागमें देवदुर्लभ प्रयागतीर्थ है, जहाँ स्नान करनेवाला मानव अग्निष्टोम-यज्ञका फल पाता है। उससे दक्षिण तिन्दुक-तीर्थ है, जिसमें स्नान करनेवाला श्रेष्ठ मानव राजसूय यज्ञका फल पाकर देवलोकमें देवताकी भाँति प्रसन्न रहता है। उससे दक्षिण पटुस्वामितीर्थ है, जो सूर्यदेवको अत्यन्त प्रिय है। वहाँ स्नान करनेके पश्चात् सूर्यदेवका दर्शन करनेसे मनुष्य भोग भोगनेके पश्चात् देवलोकमें जाता है। भद्रे ! उससे दक्षिण परम उत्तम ध्रुव-तीर्थ है, जहाँ स्नान करके ध्रुवका दर्शन करनेसे मनुष्य विष्णुधामको प्राप्त कर लेता है। ध्रुव-तीर्थसे दक्षिण भागमें सप्तर्षिसेविततीर्थ है, जहाँ स्नान करके मुनियोंका दर्शन करनेसे मनुष्य ऋषिलोकमें आनन्दका अनुभव करता है। ऋषितीर्थसे दक्षिण परम उत्तम मोक्ष-तीर्थ है, जहाँ स्नान करनेमात्रसे मनुष्य सब पापोंसे मुक्त हो जाता है। उससे