नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)
Narada Smriti with Hindi Translation
देवर्षि नारद द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 154, कुल 304 में से
संदर्भ में पढ़ेंभण्डारण — खरीदे गये माल को सुरक्षित रखने के लिए गोदाम की व्यवस्था करना। पाथेय — क्रय-विक्रय के लिए अपने ही नगर के विभिन्न क्षेत्रों में अथवा अन्य नगरों में आने जाने पर सवारी, खान पान तथा होटल आदि पर होने वाला ख़र्च, अर्थात् यात्रा-भत्ता। व्यय — कर्मचारियों का वेतन, दुकान गोदाम आदि का किराया, मरम्मत, बैंक आदि से लिये ऋण अथवा ब्याज आदि का भुगतान, काग़ज़ स्याही आदि की ख़रीद तथा बाहर के व्यापारियों के ठहराने और खान-पान पर होने वाले विभिन्न प्रकार के ख़र्च। उद्धार — अपने सामान की खपत को बढ़ाने के लिए किये जाने वाले प्रयासों—विज्ञापन, प्रचार, उपहार-योजना तथा खुदरा व्यापारियों को लुभाने व अंशदान (कमीशन)—पर आने वाला ख़र्च। भार — अपने सामान की गुणवत्ता को बनाये रखने के लिए, अर्थात् रंग- रूप, वज़न तथा माप आदि कम न होने देने के लिए किये जाने वाले कृत्रिम उपायों पर होने वाला ख़र्च। (उदाहरणार्थ, सेब आदि फलों को कोल्ड-स्टोर में रखना, गोदाम को चूहों-कीड़ों के प्रवेश से बचाने की व्यवस्था करना अथवा वर्षा आदि के कारण बिगड़े सामान पर रंग-रोगन कराना, चमकाना आदि।) सार — (मूल्यवान्) वस्तुओं—चन्दन, केसर, कस्तूरी, हीरा, मोती आदि— की सुरक्षा की अतिरिक्त व्यवस्था करना—बैंक के लॉकर में रखवाना तथा बीमा करवाना आदि। प्रमादान्नाशितं दाप्यः प्रतिषिद्धकृतं च यत्। असन्दिष्टश्च यत् कुर्यात् सर्वसम्भूयकारिभिः ॥ ५ ॥ सभी भागीदारों की सहमति प्राप्त किये बिना किसी सामान को नष्ट कर देने, भागीदारों के मना करने पर भी किसी सामान का क्रय-विक्रय करने तथा अपनी ही गलती से किसी सामान को गंवा बैठने से होने वाली हानि का दायित्व दूसरे भागीदारों का कदापि नहीं होता, अपितु हानि की भरपायी एकमात्र कर्ता को ही करनी होती है। दैवतस्करराजभ्यो व्यसने समुपस्थिते। यस्तत्स्वशक्त्या रक्षेत् तस्यांशो दशमः स्मृतः ॥ ६ ॥ आग लगने जैसी दैवी आपत्ति से, चोर डाकुओं के गिरोह से तथा राजकर्मियों के अनुचित व्यवहार (छापा-ज़ब्त करना आदि) से अकेला जूझकर एवं अपने प्राणों को संकट में डालकर साझी सम्पत्ति को बचाने वाले भागीदार को बचायी गयी सम्पत्ति का दसवां भाग पुरस्कार के रूप में देना चाहिए। 152 / नारदस्मृति