भारतकोश
संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Sankshipta Narasimha Purana Gita Press

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 109, कुल 318 में से

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पृष्ठ 109

९८ श्रीनरसिंहपुराण [ अध्याय ३०


नरवाहनस्याश्वमेधदत्तायां क्षेमकः ॥ ११॥ स च<br>राज्यस्थः प्रजाः परिपाल्य म्लेच्छाभिभूते जगति<br>ज्ञानबलात् कलापग्राममाश्रितः ॥ १२ ॥प्राप्त हुआ। नरवाहनके अश्वमेधदत्ताके गर्भसे क्षेमक नामक पुत्रका जन्म हुआ। क्षेमक राजाके पदपर प्रतिष्ठित होनेके पश्चात् प्रजाका धर्मपूर्वक पालन करने लगे। उन्हीं दिनों म्लेच्छोंका आक्रमण हुआ और सम्पूर्ण जगत् उनके द्वारा पददलित होने लगा। तब वे ज्ञानके बलसे कलापग्राममें चले आये ॥ ४–१२ ॥
यः श्रद्दधानः पठते शृणोति वा<br>हरौ च भक्तिं चरितं महीभृताम्।<br>स संततिं प्राप्य विशुद्धकर्मकृद्<br>दिवं समासाद्य वसेच्चिरं सुखी ॥ १३ ॥जो उपर्युक्त राजाओंकी हरिभक्ति तथा चरित्रका श्रद्धापूर्वक पाठ या श्रवण करता है, वह विशुद्ध कर्म करनेवाला पुरुष संतति प्राप्त करके अन्तमें स्वर्गलोकमें पहुँचकर वहाँ सुदीर्घ कालतक सुखी रहता है॥ १३॥

इति श्रीनरसिंहपुराणे शांतनुसंततिवर्णनं नाम एकोनत्रिंशोऽध्यायः ॥ २९ ॥ इस प्रकार श्रीनरसिंहपुराणमें 'शांतनुकी संततिका वर्णन' नामक उन्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ २९ ॥


तीसवाँ अध्याय

भूगोल तथा स्वर्गलोकका वर्णन

श्रीसूत उवाच<br>अतः परं प्रवक्ष्यामि भूगोलं द्विजसत्तमाः ।<br>संक्षेपात् पर्वताकीर्णं नदीभिश्च समन्ततः ॥ १<br><br>जम्बुप्लक्षाल्मलकुशक्रौञ्चशाकपुष्करसंज्ञाः<br>सप्त द्वीपाः । लक्ष्योजनप्रमाणाज्जम्बुद्वीपादुत्तरोत्तर-<br>द्विगुणाः ॥ लवणेषुरससुरासर्पिर्दधिदुग्धस्वच्छोदक-<br>संज्ञैः परस्परं द्विगुणैः सप्तसमुद्रैर्वलयाकारैस्ते द्वीपाः<br>परिवेष्टिताः ॥ २ ॥ योऽसौ मनुपुत्रः प्रियव्रतो नाम<br>स सप्तद्वीपाधिपतिर्बभूव । तस्य अग्नीध्रादयो दश<br>पुत्रा बभूवुः ॥ ३ ॥ त्रयः प्रव्रजिताः । शिष्टानां सप्तानां<br>सप्तद्वीपाः पित्रा दत्ताः । तत्र जम्बुद्वीपाधिपतेरग्नीध्रस्य<br>नव पुत्रा जाताः ॥ ४ ॥<br><br>नाभिः किम्पुरुषश्चैव हरिवर्ष इलावृतः ।<br>रम्यो हिरण्मयश्चैव कुरुर्भद्रश्च केतुमान् ॥ ५**श्रीसूतजी बोले—**द्विजवरो! अब मैं सब ओर नदी तथा पर्वतोंसे व्याप्त भूगोल (भूमिमण्डल)-का संक्षेपसे वर्णन करूँगा ॥ १ ॥<br><br>इस पृथ्वीपर जम्बू, प्लक्ष, शाल्मलि, कुश, क्रौञ्च, शाक और पुष्कर नामके सात द्वीप हैं। इनमें जम्बूद्वीप तो लाख योजन लंबा-चौड़ा है और प्लक्ष आदि जम्बूद्वीपसे उत्तरोत्तर दुगुने बड़े हैं। ये द्वीप क्रमशः अपनेसे दूने प्रमाणवाले लवण, इक्षुरस, सुरा, घृत, दधि, दुग्ध और शुद्धोदक नामसे विख्यात सात वलयाकार समुद्रोंसे घिरे हुए हैं। मनुके जो 'प्रियव्रत' नामक पुत्र थे, वे ही सात द्वीपोंके अधिपति हुए। उनके अग्नीध्र आदि दस पुत्र हुए। इनमेंसे तीन तो सर्वत्यागी संन्यासी हो गये और शेष सातोंको उनके पिताने एक-एक द्वीप बाँट दिया। इनमें जम्बूद्वीपके अधिपति 'अग्नीध्र'के नौ पुत्र हुए। उनके नाम ये हैं—नाभि, किम्पुरुष, हरिवर्ष, इलावृत, रम्य, हिरण्मय, कुरु, भद्र और केतुमान् ॥ २–५ ॥