भारतकोश
संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Sankshipta Narasimha Purana Gita Press

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished318 पृष्ठ

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पृष्ठ 252

अध्याय ५४ ] कल्कि-चरित्र और कलि-धर्म २४१ चौवनवाँ अध्याय कल्कि-चरित्र और कलि-धर्म

मार्कण्डेय उवाच अतः परं प्रवक्ष्यामि शृणु राजन् समाहितः। प्रादुर्भावं हरेः पुण्यं कल्क्याख्यं पापनाशनम्॥ १ कलिकालने राजेन्द्र नष्टे धर्मे महीतले। वृद्धिंगते तथा पापे व्याधिसम्पीडिते जने॥ २ देवैःसम्प्रार्थितो विष्णुः क्षीराब्धौ स्तुतिपूर्वकम्। साम्भलाख्ये महाग्रामे नानाजनसमाकुले॥ ३ नाम्ना विष्णुयशःपुत्रः कल्की राजा भविष्यति। अश्वमारुह्य खड्गेन म्लेच्छानुत्सादयिष्यति॥ ४ म्लेच्छान् समस्तान् क्षितिनाशभूतान् हत्वा स कल्की पुरुषोत्तमांशः। कृत्वा च यागं बहुकाञ्चनाख्यं संस्थाप्य धर्मे दिवमारुरोह॥ ५ दशावताराः कथितास्तवैव हरेर्मया पार्थिव पापहन्तुः। इमं सदा यस्तु नृसिंहभक्तः शृणोति नित्यं स तु याति विष्णुम्॥ ६

मार्कण्डेयजी बोले—राजन्! इसके बाद मैं तुमसे भगवान् विष्णुके ‘कल्कि’ नामक पावन अवतारका वर्णन करता हूँ, जो समस्त पापोंको नष्ट करनेवाला है; तुम सावधान होकर सुनो। राजेन्द्र! जब कलिकालद्वारा पृथ्वीपर धर्मका नाश हो जायगा, पाप बढ़ जायगा और सभी लोग नाना प्रकारके रोगोंसे पीड़ित होने लगेंगे, तब देवतालोग क्षीरसागरके तटपर जाकर वहाँ भगवान् विष्णुकी स्तुति करते हुए उनसे प्रार्थना करेंगे। तदनन्तर भगवान् ‘साम्भल’ नामक महान् ग्राममें, जो बहुसंख्यक मनुष्योंसे परिपूर्ण होगा, विष्णुयशाके पुत्ररूपसे अवतार ले, ‘कल्कि’ नामसे विख्यात राजा होंगे। फिर वे घोड़ेपर चढ़कर, हाथमें तलवार ले, म्लेच्छोंका नाश करेंगे। इस प्रकार भगवान् विष्णुके अंशभूत ‘कल्कि’ भूमण्डलका ध्वंस करनेवाले समस्त म्लेच्छोंका संहार कर, ‘बहुकाञ्चन’ नामक यज्ञ करके, धर्मकी स्थापना कर स्वर्गारूढ हो जायँगे। राजेन्द्र! पापोंका नाश करनेवाले भगवान् विष्णुके इन दस अवतारोंका मैंने वर्णन किया। जो भगवद्भक्त पुरुष इन अवतार-चरित्रोंका नित्य श्रवण करता है, वह भगवान् विष्णुको प्राप्त कर लेता है॥ १-६॥

राजोवाच तव प्रसादाद्विप्रेन्द्र प्रादुर्भावाः श्रुता मया। नारायणस्य देवस्य शृण्वतां कल्मषापहाः॥ ७ कलिं विस्तरतो ब्रूहि त्वं हि सर्वविदां वरः। ब्राह्मणाः क्षत्रिया वैश्याः शूद्राश्च मुनिसत्तम॥ ८ किमाहाराः किमाचारा भविष्यन्ति कलौ युगे।

राजा बोले—विप्रेन्द्र! आपके प्रसादसे मैंने भगवान् नारायणके अवतारोंका, जो श्रोताओंके पापोंका नाश करनेवाले हैं, श्रवण कर लिया। मुनिसत्तम! अब आप कलिको विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिये; क्योंकि आप सर्वज्ञ महात्माओंमें सबसे श्रेष्ठ हैं। कृपया बताइये कि कलियुगमें ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र कैसे आहार और आचरणवाले होंगे॥ ७-८१/२॥

सूत उवाच शृणुध्वमृषयः सर्वे भरद्वाजेन संयुताः॥ ९ सर्वे धर्मा विनश्यन्ति कृष्णे कृष्णत्वमागते। तस्मात् कलिर्महाघोरः सर्वपापस्य साधकः॥ १०

सूतजी बोले—भरद्वाजसहित आप सभी ऋषिगण सुनें। राजाके यों प्रेरणा करनेपर मार्कण्डेयजीने कलि-धर्मका इस प्रकार निरूपण किया। भगवान् कृष्णचन्द्रके परमधाम पधार जानेपर उनके अन्तर्धानके फलस्वरूप समस्त पापोंका साधक महाघोर कलियुग प्रकट होगा;