भारतकोश
संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Sankshipta Narasimha Purana Gita Press

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 55, कुल 318 में से

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पृष्ठ 55

४४ | श्रीनरसिंहपुराण | [ अध्याय ११ नमः कमलनाभाय नमः कमलमालिने। | जिनकी नाभिसे कमल प्रकट हुआ है तथा लोकनाथ नमस्तेऽस्तु वीरभद्र नमोऽस्तु ते॥ १५ | जो कमलकी माला पहने हुए हैं, उन भगवान्‌को नमस्त्रैलोक्यनाथाय चतुर्मूर्ते जगत्पते। | नमस्कार है। लोकनाथ! वीरभद्र! आपको बार-बार नमो देवाधिदेवाय नमो नारायणाय ते॥ १६ | नमस्कार है। चतुर्व्यूहस्वरूप जगदीश्वर! आप त्रिभुवननाथ देवाधिदेव नारायणको नमस्कार है। पीताम्बरधारी वासुदेवको नमस्ते वासुदेवाय नमस्ते पीतवाससे। | प्रणाम है, प्रणाम है। शार्ङ्गधनुष धारण करनेवाले नमस्ते नरसिंहाय नमस्ते शार्ङ्गधारिणे॥ १७ | नरसिंहस्वरूप आप भगवान् विष्णुको नमस्कार है, नमस्कार है। भुवनेश्वर! चक्रधारी विष्णु, कृष्ण, राम नमः कृष्णाय रामाय नमश्चक्रायुधाय च। | और भगवान् शिवके रूपमें वर्तमान आपको बार-बार नमः शिवाय देवाय नमस्ते भुवनेश्वर॥ १८ | नमस्कार है। सबके स्वामी श्रीधर! अच्युत! वेदान्त नमो वेदान्तवेद्याय नमोऽनन्ताय विष्णवे। | शास्त्रके द्वारा जाननेयोग्य आप अन्तरहित भगवान् नमस्ते सकलाध्यक्ष नमस्ते श्रीधराच्युत॥ १९ | विष्णुको बारम्बार नमस्कार है। लोकाध्यक्ष! जगत्पूज्य परमात्मन्! आपको नमस्कार है॥ १५-१९१/२॥ लोकाध्यक्ष जगत्पूज्य परमात्मन् नमोऽस्तु ते। | आप ही समस्त संसारकी माता और आप ही त्वं माता सर्वलोकानां त्वमेव जगतः पिता॥ २० | सम्पूर्ण जगत्के पिता हैं। आप पीड़ितोंके सुहृद् हैं; आप त्वमार्तानां सुहृन्मित्रं प्रियस्त्वं प्रपितामहः। | सबके मित्र, प्रियतम, पिताके भी पितामह, गुरु, गति, त्वं गुरुस्त्वं गतिः साक्षी त्वं पतिस्त्वं परायणः॥ २१ | साक्षी, पति और परम आश्रय हैं। आप ही ध्रुव, वषट्कर्ता, हवि, हुताशन (अग्नि), शिव, वसु, धाता, त्वं ध्रुवस्त्वं वषट्कर्ता त्वं हविस्त्वं हुताशनः। | ब्रह्मा, सुरराज इन्द्र, यम, सूर्य, वायु, जल, कुबेर, मनु, त्वं शिवस्त्वं वसुर्धाता त्वं ब्रह्मा त्वं सुरेश्वरः॥ २२ | दिन-रात, रजनी, चन्द्रमा, धृति, श्री, कान्ति, क्षमा और त्वं यमस्त्वं रविर्वायुस्त्वं जलं त्वं धनेश्वरः। | धराधर शेषनाग हैं। चराचरस्वरूप मधुसूदन! आप ही त्वं मनुस्त्वमहोरात्रं त्वं निशा त्वं निशाकरः। | जगत्के स्रष्टा, शासक और संहारक हैं तथा आप ही त्वं धृतिस्त्वं श्रियः कान्तिस्त्वं क्षमा त्वं धराधरः॥ २३ | समस्त संसारके रक्षक हैं। आप ही करण, कारण, कर्ता और परमेश्वर हैं। हाथमें शङ्ख, चक्र और गदा धारण त्वं कर्ता जगतामीशस्त्वं हन्ता मधुसूदन। | करनेवाले माधव! आप मेरा उद्धार करें। कमलदललोचन त्वमेव गोप्ता सर्वस्य जगतस्त्वं चराचर॥ २४ | प्रियतम! शेषशय्यापर शयन करनेवाले पुरुषोत्तम आपको करणं कारणं कर्ता त्वमेव परमेश्वरः। | ही मैं सदा भक्तिके साथ प्रणाम करता हूँ। देव! जिसमें शङ्खचक्रगदापाणे भो समुद्धर माधव॥ २५ | श्रीवत्सचिह्न शोभा पाता है, जो जगत्का आदिकारण है, जिसका वर्ण श्यामल और नेत्र कमलके समान हैं तथा प्रिय पद्मपलाशाक्ष शेषपर्यङ्कशायिनम्। | जो कलिके दोषोंको नष्ट करनेवाला है, आपके उस त्वामेव भक्त्या सततं नमामि पुरुषोत्तमम्॥ २६ | श्रीविग्रहको मैं नमस्कार करता हूँ॥ २०-२७॥ श्रीवत्साङ्कं जगद्बीजं श्यामलं कमलेक्षणम्। | जो लक्ष्मीजीको अपने हृदयमें धारण करते हैं, नमामि ते वपुर्देव कलिकल्मषनाशनम्॥ २७ | जिनका शरीर सुन्दर है, जो दिव्यमालासे विभूषित लक्ष्मीधरमुदाराङ्गं दिव्यमालाविभूषितम्। | हैं, जिनका पृष्ठदेश सुन्दर और भुजाएँ बड़ी-बड़ी चारुपृष्ठं महाबाहुं चारुभूषणभूषितम्॥ २८ | हैं, जो सुन्दर आभूषणोंसे अलंकृत हैं, जिनकी नाभिसे पद्म प्रकट हुआ है, जिनके नेत्र कमलदलके पद्मनाभं विशालाक्षं पद्मपत्रनिभेक्षणम्। | समान सुन्दर और विशाल हैं, नासिका बड़ी ऊँची दीर्घतुङ्गमहाघ्राणं नीलजीमूतसंनिभम्॥ २९ | और लम्बी है, जो नील मेघके समान श्याम हैं, जिनकी भुजाएँ लम्बी, शरीर सुरक्षित और वक्षःस्थल दीर्घबाहुं सुगुप्ताङ्गं रत्नहारोज्ज्वलोरसम्। | रत्नोंके हारसे प्रकाशमान है, जिनकी भौंहें, ललाट सुभ्रूललाटमुकुटं स्निग्धदन्तं सुलोचनम्॥ ३० | और मुकुट-सभी सुन्दर हैं, दाँत चिकने और नेत्र In Public Domain. Digitzed by Sarvagya Sharda Peeth