भारतकोश
संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Sankshipta Narasimha Purana Gita Press

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 87, कुल 318 में से

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पृष्ठ 87

७६ श्रीनरसिंहपुराण [ अध्याय २३ तेईसवाँ अध्याय चौदह मन्वन्तरोंका वर्णन सूत उवाच | सूतजी बोले—प्रथम 'स्वायम्भुव' मन्वन्तर है, उसका प्रथमं तावत् स्वायम्भुवं मन्वन्तरं तत्स्वरूपं | स्वरूप पहले बतलाया जा चुका है। सृष्टिके आदिकालमें कथितम्। सर्गादौ स्वारोचिषो नाम द्वितीयो | 'स्वारोचिष' नामक द्वितीय मनु हुए थे। उस स्वारोचिष मनुः ॥ १ ॥ तस्मिन् स्वारोचिषे मन्वन्तरे विपश्चिन्नाम | मन्वन्तरमें 'विपश्चित्' नामक देवराज इन्द्र थे। उस समयके देवेन्द्रः। पारावताः सतुषिता देवाः ॥ २॥ ऊर्जस्तम्बः | देवता 'पारावत' और 'तुषित' नामसे प्रसिद्ध थे। ऊर्जस्तम्ब, सुप्राणो दन्तो निर्ऋषभो वरीयानीश्वरः सोमः | सुप्राण, दन्त, निर्ऋषभ, वरीयान्, ईश्वर और सोम—ये सप्तर्षयश्चैवम् किम्पुरुषाद्याः स्वारोचिषस्य मनोः | उस मन्वन्तरमें सप्तर्षि थे। इसी प्रकार 'स्वारोचिष' पुत्रा राजानो भवन्ति ॥ ३ ॥ तृतीय उत्तमो नाम मनुः । | मनुके किम्पुरुष आदि पुत्र उन दिनों भूमण्डलके राजा सुधामानः सत्याः शिवाः प्रतर्दना वंशवर्तिनश्च देवाः । | थे। तृतीय मनु 'उत्तम' नामसे प्रसिद्ध हुए। उनके समयमें पञ्चैते द्वादशगणाः ॥ ४ ॥ तेषां सुशान्तिरिन्द्रः ॥ ५ ॥ | सुधामा, सत्य, शिव, प्रतर्दन और वंशवर्ती (अथवा वन्द्याः सप्तर्षयोऽभवन्। अत्र परशुचित्राद्या मनोः | वशवर्ती)—ये पाँच देवगण थे। इनमेंसे प्रत्येक गणमें सुताः ॥ ६ ॥ चतुर्थस्तामसो नाम मनुः । तत्र मन्वन्तरे | बारह-बारह व्यक्ति थे। इन देवताओंके इन्द्रका नाम सुराः पराः सत्याः सुधियश्च सप्तविंशतिका | था—'सुशान्ति'। उन दिनों जो सप्तर्षि थे, उनकी 'वन्द्य' गणाः ॥ ७॥ तत्र भृशुण्डी नाम देवेन्द्रः । हिरण्यरोमा | संज्ञा थी। इस मन्वन्तरमें 'परशु' और 'चित्र' आदि देवश्रीरूर्ध्वबाहुर्देवबाहुः सुधामा ह पर्जन्यो | मनुपुत्र राजा थे। चौथे मनुका नाम था—'तामस'। उनके मुनिरित्येते सप्तर्षयः ॥८॥ ज्योतिर्धामा पृथुः | मन्वन्तरमें देवताओंके पर, सत्य और सुधी नामवाले काश्योऽग्निर्षनक इत्येते तामसस्य मनोः पुत्रा | गण थे। इनमेंसे प्रत्येक गणमें सत्ताईस-सत्ताईस देवता राजानः ॥ ९॥ पञ्चमो नाम रैवतो मनुः । | थे। इन देवताओंके राजा इन्द्रका नाम था—'भृशुण्डी'। तस्यान्तरेऽमिता निरता वैकुण्ठाः सुमेधस इत्येते | उस समय हिरण्यरोमा, देवश्री, ऊर्ध्वबाहु, देवबाहु, सुधामा, देवगणाश्चतुर्दशका गणाः । असुरान्तको नाम देवेन्द्रः । | पर्जन्य और मुनि—ये सप्तर्षि थे। ज्योतिर्धाम, पृथु, काश्य, ससकाद्या मनोः सुता राजानो वै बभूवुः ॥ १० ॥ | अग्नि और धनक—ये तामस मनुके पुत्र इस भूमण्डलके शान्तः शान्तभयो विद्वांस्तपस्वी मेधावी सुतपाः | राजा थे। पाँचवें मनुका नाम था—'रैवत'। उनके सप्तर्षयोऽभवन् ॥ ११ ॥ षष्ठश्चाक्षुषो नाम मनुः । | मन्वन्तरमें अमित, निरत, वैकुण्ठ और सुमेधा—ये पुरुशतद्युम्नप्रमुखास्तस्य सुता राजानः। सुशान्ता | देवताओंके गण थे। इनमेंसे प्रत्येक गणमें चौदह-चौदह आप्याः प्रसूता भव्याः प्रथिताश्च महानुभावा | व्यक्ति थे। इन देवताओंके जो इन्द्र थे, उनका नाम लेखाद्याः पञ्चैते ह्यष्टका गणास्तत्र देवाः ॥ १२ ॥ | था—'असुरान्तक'। उस समय ससक आदि मनुपुत्र भूतलके तेषामिन्द्रो मनोजवः। मेधाः सुमेधा विरजा | राजा थे। शान्त, शान्तमय, विद्वान्, तपस्वी, मेधावी और हविष्मानुत्तमो मतिमान्नाम्ना सहिष्णुश्चैते | सुतपा—ये सप्तर्षि थे। छठे मनुका नाम 'चाक्षुष' था। सप्तर्षयः ॥ १३ ॥ सप्तमो वैवस्वतो मनुः साम्प्रतं वर्तते । | उनके समयमें पुरु और शतद्युम्न आदि मनुपुत्र राजा थे। तस्य पुत्रा इक्ष्वाकुप्रभृतयः क्षत्रिया भूभुजः ॥ १४ ॥ | उस समय अत्यन्त शान्त रहनेवाले लेख, आप्य, प्रसूत, | भव्य और प्रथित—ये पाँच महानुभाव देवगण थे। इन | पाँचों गणोंमें आठ-आठ व्यक्ति थे। इनके इन्द्रका नाम | 'मनोजव' था। उन दिनों मेधा, सुमेधा, विरजा, हविष्मान्, | उत्तम, मतिमान् और सहिष्णु—ये सप्तर्षि थे। सातवें | मनुको 'वैवस्वत' कहते हैं, जो इस समय वर्तमान | हैं। इनके इक्ष्वाकु आदि क्षत्रियजातीय पुत्र भूपाल हुए। In Public Domain. Digitzed by Sarvagya Sharda Peeth