भारतकोश
संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

संक्षिप्त नृसिंह पुराण (सचित्र हिन्दी अनुवाद सहित)

Sankshipta Narasimha Purana Gita Press

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished318 पृष्ठ

पृष्ठ 88, कुल 318 में से

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पृष्ठ 88

अध्याय २३ ] चौदह मन्वन्तरोंका वर्णन ७७ आदित्यविश्ववसुरुद्राद्या देवाः पुरंदरोऽत्र देवेन्द्रः ॥ १५ ॥ वसिष्ठः कश्यपोऽत्रिर्जमदग्निर्गौतम- विश्वामित्रभरद्वाजाः सप्तर्षयो भवन्ति ॥ १६ ॥ भविष्याणि मन्वन्तराणि कथ्यन्ते । तद्यथा आदित्यात् संज्ञायां जातो यो मनुः पूर्वोक्तश्छायायामुत्पन्नो मनुर्द्वितीयः स तु । पूर्वजस्य सावर्ण्यस्य मन्वन्तरं सावर्णिमकमष्टमं शृणु ॥ १७ ॥ मनुः सावर्णीऽष्टमो भविता तत्र सुतपाद्या देवगणास्तेषां बलिरिन्द्रो भविता ॥ १८ ॥ दीप्तिमान् गालवो नामा कृपद्रौणिर्व्यासऋष्यशृङ्गाश्च सप्तर्षयो भवितारः । विराजोर्वरीयनिर्मोकाद्याः सावर्ण्यस्य मनोः सुता राजानो भविष्यन्ति ॥ १९ ॥ नवमो दक्ष- सावर्णिर्मनुर्भविता । धृतिः कीर्तिर्दीप्तिः केतुः पञ्चहस्तो निरामयः पृथुश्रवाद्या दक्षसावर्णा राजानोऽस्य मनोः पुत्राः ॥ २० ॥ मरीचिगर्भाः सुधर्माणो हविष्मन्तस्तत्र देवताः । तेषामिन्द्रोऽद्भुतः ॥ २१ ॥ सवनः कृतिमान् हव्यो वसुमेधातिथिर्ज्योतिष्मानित्येते सप्तर्षयः ॥ २२ ॥ दशमो ब्रह्मसावर्णिर्मनुर्भविता । विरुद्धादयस्तत्र देवाः । तेषां शान्तिरिन्द्रः । हविष्मान् सुकृतिः सत्यस्तपोमूर्तिर्नाभागः प्रतिमोकः सप्तकेतुरित्येते सप्तर्षयः ॥ २३ ॥ सुक्षेत्र उत्तमो भूरिषेणादयो ब्रह्मसावर्णिपुत्रा राजानो भविष्यन्ति ॥ २४ ॥ एकादशे मन्वन्तरे धर्मसावर्णिको मनुः ॥ २५ ॥ सिंहसवनादयो देवगणाः । तेषां दिवस्पतिरिन्द्रः ॥ २६ ॥ निर्मोहस्तत्त्वदर्शी निकम्पो निरुत्साहो धृतिमान् रुच्य इत्येते सप्तर्षयः । चित्रसेनविचित्राद्या धर्मसावर्णिपुत्रा भूभृतो भविष्यन्ति ॥ २७ ॥ रुद्रसावर्णिर्भविता द्वादशो मनुः ॥ २८ ॥ कृतधामा तत्रेन्द्रो हरिता रोहिताः सुमनसः सुकर्माणः सुतपाश्च देवाः ॥ २९ ॥ तपस्वी चारुतपास्तपोमूर्तिस्तपोरतिस्तपोधृतिर्ज्योतिस्तप इत्येते सप्तर्षयः ॥ ३० ॥ देववान् देवश्रेष्ठाद्यास्तस्य मनोः सुता भूपाला भविष्यन्ति ॥ ३१ ॥ त्रयोदशो रुचिर्नाम मनुः । स्रग्वौ बाणः सुधर्मा प्रभृतयो देवगणाः ।


इस मन्वन्तरमें आदित्य, विश्ववसु और रुद्र आदि देवगण हैं और 'पुरंदर' इनके इन्द्र हैं। वसिष्ठ, कश्यप, अत्रि, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भरद्वाज—ये इस मन्वन्तरके सप्तर्षि हैं ॥ १—१६ ॥ अब भविष्य मन्वन्तरोंका वर्णन किया जाता है— आदित्यसे संज्ञाके गर्भसे उत्पन्न हुए जो 'मनु' हैं, उनकी चर्चा पहले हो चुकी है और छायाके गर्भसे उत्पन्न दूसरे 'मनु' हैं। इनमें प्रथम उत्पन्न हुए जो 'सावर्ण' मनु हैं, उनके ही 'सावर्णिक' नामक आठवें मन्वन्तरका वर्णन सुनिये। 'सावर्ण' ही आठवें मनु होंगे। उस समय सुतप आदि देवगण होंगे और 'बलि' उनके इन्द्र होंगे। दीप्तिमान्, गालव, नामा, कृप, अश्वत्थामा, व्यास और ऋष्यशृङ्ग— ये सप्तर्षि होंगे। विराज, उर्वरीय और निर्मोक आदि सावर्ण मनुके पुत्र राजा होंगे। नवें भावी मनु 'दक्षसावर्णि' हैं। धृति, कीर्ति, दीप्ति, केतु, पञ्चहस्त, निरामय तथा पृथुश्रवा आदि दक्षसावर्णि मनुके पुत्र उस समय राजा होंगे। उस मन्वन्तरमें मरीचिगर्भ, सुधर्मा और हविष्मान्— ये देवता होंगे और उनके इन्द्र 'अद्भुत' नामसे प्रसिद्ध होंगे। सवन, कृतिमान्, हव्य, वसु, मेधातिथि तथा ज्योतिष्मान् (और सत्य)—ये सप्तर्षि होंगे। दसवें मनु 'ब्रह्मसावर्णि' होंगे। उस समय विरुद्ध आदि देवता और उनके 'शान्ति' नामक इन्द्र होंगे। हविष्मान्, सुकृति, सत्य, तपोमूर्ति, नाभाग, प्रतिमोक और सप्तकेतु—ये सप्तर्षि होंगे। सुक्षेत्र, उत्तम, भूरिषेण आदि 'ब्रह्मसावर्णि' के पुत्र राजा होंगे। ग्यारहवें मन्वन्तरमें 'धर्मसावर्णि' नामक मनु होंगे। उस समय सिंह, सवन आदि देवगण और उनके 'दिवस्पति' नामक इन्द्र होंगे। निर्मोह, तत्त्वदर्शी, निकम्प, निरुत्साह, धृतिमान् और रुच्य—ये सप्तर्षि होंगे। चित्रसेन और विचित्र आदि धर्मसावर्णि मनुके पुत्र राजा होंगे। बारहवें मनु 'रुद्रसावर्णि' होंगे। उस मन्वन्तरमें 'कृतधामा' नामक इन्द्र और हरित, रोहित, सुमना, सुकर्मा तथा सुतपा नामक देवगण होंगे। तपस्वी, चारुतपा, तपोमूर्ति, तपोरति, तपोधृति, ज्योति और तप—ये सप्तर्षि होंगे। रुद्रसावर्णिके पुत्र देववान् और देवश्रेष्ठ आदि भूमण्डलके राजा होंगे। तेरहवें मनुका नाम 'रुचि' होगा। उस समय स्रग्वौ, बाण और सुधर्मा