निरुक्तम् (महर्षि यास्क मुनि - निघण्टु एवं वैदिक शब्द-व्युत्पत्ति सान्वय सटीक भाष्य)

निरुक्तम् (महर्षि यास्क मुनि - निघण्टु एवं वैदिक शब्द-व्युत्पत्ति सान्वय सटीक भाष्य)
Niruktam of Maharshi Yaska with Nighantu and Hindi Commentary
महर्षि यास्क मुनि द्वारा
DevanagariHindipublished1,282 पृष्ठ
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हिन्दी निरुक्त ( २८१ ) ६ अ० ४ पा० ६ खं० (२१) [३य पा०-] वृषभः (२२) कयन्नादयन् ( २३ ) इमन्तम् (२४) पितुं नु (२५) इमं मे (२६) आपो हि ष्ठा (२७) या ओषधीः (२८) आ रात्री (२९) अरण्यानि (३०) श्रद्धयाग्निः (३१) स्यो- ना (३२) अमीषाम् (३३ इहेन्द्राणी ( ३४ ) [ ४र्थ पा०- ] अणतः (३५) आजयी (३६) आवाम् (३७) द्यावानः (३८) प्रपर्वतानाम् (३६) ते आचरन्ती ( ४० ) शुनासीरौ ( ४१ ) देवीजोष्ट्री [४२] देवी ऊर्जाहुती (४३) इति निरुक्ते (उत्तर षट्के) नवमोऽध्यायः ॥६, ४॥ इति हिन्दी निरुक्ते (उत्तर षट्के) नवमोऽध्यायः ॥६,४॥