निरुक्तम् (महर्षि यास्क मुनि - निघण्टु एवं वैदिक शब्द-व्युत्पत्ति सान्वय सटीक भाष्य)

निरुक्तम् (महर्षि यास्क मुनि - निघण्टु एवं वैदिक शब्द-व्युत्पत्ति सान्वय सटीक भाष्य)
Niruktam of Maharshi Yaska with Nighantu and Hindi Commentary
महर्षि यास्क मुनि द्वारा
DevanagariHindipublished1,282 पृष्ठ
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हिन्दी निरुक्त । ७३ नैघण्टुकास्तु ये शब्दाः प्रत्यर्थं गणसंस्थिताः । छन्दोभ्योऽन्विष्यतत्वार्थान् निर्ब्रूयात् योग- तस्तुतान् ॥ अर्थः-पृथक् पृथक् अर्थवाले गणोंमें जो नैघण्टुक शब्द हैं, उनको छन्दों या मन्त्रोंसे तत्वार्थ-सहित अन्वेषणा करके शास्त्रके नियमोंके अनुसार निर्वचन करे ॥ ५ ॥ इति हिन्दी निरुक्ते द्वितीयाध्यायस्य द्वितीयंपादः ।