भारतकोश
निरुक्तम् (महर्षि यास्क मुनि - निघण्टु एवं वैदिक शब्द-व्युत्पत्ति सान्वय सटीक भाष्य)

निरुक्तम् (महर्षि यास्क मुनि - निघण्टु एवं वैदिक शब्द-व्युत्पत्ति सान्वय सटीक भाष्य)

Niruktam of Maharshi Yaska with Nighantu and Hindi Commentary

महर्षि यास्क मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished1,282 पृष्ठ

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पृष्ठ 336

२८ ३ अ० १ पा० ६ खं० । स्त्री तो नियमसे ही दी जाती है, बेची जाती है और त्यागी जाती है, अर्थात् वह परार्थ ही उत्पन्न की जाती है, इससे वह अभागा है या पिताके धनकी अधिकारिणी नहीं होती ॥ ६ ॥ इति हिन्दीनिरुक्ते तृतीयाध्यायस्य प्रथमः पादः समाप्तः ॥ ३, १ ॥