निरुक्तम् (महर्षि यास्क मुनि - निघण्टु एवं वैदिक शब्द-व्युत्पत्ति सान्वय सटीक भाष्य)
Niruktam of Maharshi Yaska with Nighantu and Hindi Commentary
महर्षि यास्क मुनि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दी निरुक्त । ४५ 'धुर्व्' (स्वादि० प०) धातुसे है। यहभी 'दूसरी धूर्' (धुरी या भार) जो बैल आदिसे सम्बन्ध रखतीहै बेल या घोड़ा उसे मारती है। अथवा 'धारयति' (धारणार्थक 'धृञ्' चु० उ०) धातु- से है। अङ्गुलि नामोंके अनन्तर अठारह (१८) कान्ति (कामना) अर्थवाले धातु हैं। कान्त्यर्थक धातुओंके अनन्तर अट्ठाईस (२८) अन्नके नाम हैं। “अन्न” किस अर्थसे हैं? भूतो य' प्राणियोंके सामने संमुख भावसे झुक जाता है। (आङ् उप० 'नम्' (भ्वा० प०) धा०) । अथवा 'अद' भक्षणे (अदा० प०) धातुसे है। क्योकि-प्राणी उसे खाते हैं। अन्न नामोंके अनन्तर दश (१०) अति भक्षण) अर्थवाले धातु हैं। अत्तिकर्म धातुओंके अनन्तर अठाईस (२८) बलके नाम हैं। 'बल' क्यों ? [जोही पुरुष गर्व करता है वह उससे भरण या धारण किया जाता है। 'बल' भर होता है। 'डुभृञ् धारणपोषणयोः' (तु० उ०) धातुसे है। बल नामोंके अनन्तर अट्ठाईस (२८) ही धनके नाम हैं। 'धन' किस अर्थसे है ? 'धिनोति' (धि-धा० स्वा० उ०) इस कर्तृवाच्य तर्पणार्थक धातुसे है। [क्योंकि-वह प्राप्त होकर पुरुषको तृप्त कर देता है] धन नामोंके अनन्तर नव (६) गोके नाम हैं। गो नामोंके अनन्तर दश (१०) क्रोधार्थक धातु हैं। क्रधार्थक धातुओंके अनन्तर ग्यारह (११) क्रोधके नाम हैं। क्रोध नामोंके अनन्तर गति अर्थवाले एकसौ बाईस (१२२) धातु हैं। गत्यर्थक धातुओंके अनन्तर (२६) क्षिप्र (शीघ्र) के नाम हैं। 'क्षिप्र' किस अर्थसे है ? विशेष रूपसे खैंचा हुआ या संक्षिप्त किया हुआ कहा जाता है।