भारतकोश
निरुक्तम् (महर्षि यास्क मुनि - निघण्टु एवं वैदिक शब्द-व्युत्पत्ति सान्वय सटीक भाष्य)

निरुक्तम् (महर्षि यास्क मुनि - निघण्टु एवं वैदिक शब्द-व्युत्पत्ति सान्वय सटीक भाष्य)

Niruktam of Maharshi Yaska with Nighantu and Hindi Commentary

महर्षि यास्क मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished1,282 पृष्ठ

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पृष्ठ 91

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हिन्दी निरुक्त। ६१ ┌ पदपूरण----------वेदे--- ४ प्रसोमादित्यो असृजत् │                     [ ऋ०-सं०-२-७-६-४ ] │                     [ व्याख्या - प्रासृजत सूर्यों रश्मीन् ] │                     ( इति पदपूरण एव ) │                    ┌प्रसीमेत्यादि० [ऋ० सं० सीम ┤                    │ २-७-६-४] व्याख्या-प्रससृजत् │                    │ सर्वत -( इति परिग्रहार्थ ) │                    │ ५ विसीमतः सुरुचो वेन │                    │ आवः ( वक्ष्यमाण ) └ परिग्रह----------वेदे---┤ [ यजु० सं० १३-३६ ] │ विसोमतःसु--वः [मा० │ स० छ० आ० ४-१-३-६] │ [व्याख्या आदिव्य सुरुच = रश्मीन्, │ सीमत = सन्त वि=आव = └ वातवान् । ३- - अगस्त्यने पहिले इन्द्रके लिये हविका निर्वाप करके पीछे मरुत देवताओका देनेका विचार कर लिया, इससे इन्द्रने आकर परिदेवना की, परिदेवना नाम क्रोधपूर्वक विलापका है। इसी निदानपर यह मन्त्र प्रकट हुआ है। | इन्द्र |--मेरा पहिले यह विचारणीय है कि - 'आजका हवि मेरा नही है, तो कलका भी न होगा। अर्थात आजके भागको छोड़कर कलके भागपर भी आशा नही कर सकते, क्योंकि—आज जो हमारे लिये हवि निर्वाप किया गया था, वही हमे नही मिला, तो कल पर क्या प्रत्याशा है ? कारण यह है कि -जो वस्तु उत्पन्न नहीं हुई है, उसको कौन जानता है, वह किसको होगी ? मेरी या दूसरेकी। और यह भी कारण है कि -दूसरेका चित्त चञ्चल होता है, उसकी स्थिरता नहीं। आजके हविको मैने जाना था कि—यह मेरा होगा, तो भी यह नष्ट हुआ जाता है। ३-गृत्समद ऋषि । पृष्ट्यके चतुर्थ अहन्में मरुत्त्वतीयम शस्त्र हैं। इस मन्त्रमें 'नूनम्' केवल पदपूरणके लिये ही है। हे इन्द्र ! तेरे पुत्रभावक कर्मम रहनेवाली जो दक्षिणा है, सो स्तुति करनेवाले यजमानको वर दे। [यद्यपि दक्षिणावान् कर्मसे ही फलकी प्राप्ति होती है, किन्तु दक्षिणासे नहीं, तथापि यहां दक्षिणाकी महिमा कहनेके लिये उसीमे फल सामर्थ्य कहा गया है ] दक्षिणामें हिरण्य धान्य आदि सब रहता है। और हे इन्द्र ! तू ऋत्विजोंको शिक्षा या सद्बुद्धि दे। और हम छोड़कर औरोंको