भारतकोश
नीति शतक (भर्तृहरि - डॉ. राकेश शास्त्री हिन्दी व्याख्या सहित)

नीति शतक (भर्तृहरि - डॉ. राकेश शास्त्री हिन्दी व्याख्या सहित)

Niti Shataka of Bhartrihari Hindi

महाराज भर्तृहरि द्वारा

स्रोत: Neeti Shataka with Sanskrit Shlokas, Anvaya & Hindi Commentary by Dr. Rakesh Shastri (उद्गम)

DevanagariHindipublished194 पृष्ठ

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१६८ श्रीभर्तृहरिविरचितम्

सुधास्यन्दिभिः = अमृतवर्षी, सुरतमृदिता = सम्भोग में मर्दन की गई, सूनुः = पुत्र, सूर्यातपः = सूर्य की धूप, सृजति = रचना करता है।

स्पृष्टः = स्पर्श किया गया, स्युः = होने चाहिएँ, स्पृहा = इच्छा, हतविधेः = दुष्ट विधाता, हर्तुः = हरण करने वाले के, ह्रीमति = लज्जा से, हुत्भुक् = अग्नि, हेतिनिहतः = शस्त्रों द्वारा घायल।