नीति शतक (भर्तृहरि - डॉ. राकेश शास्त्री हिन्दी व्याख्या सहित)

नीति शतक (भर्तृहरि - डॉ. राकेश शास्त्री हिन्दी व्याख्या सहित)
Niti Shataka of Bhartrihari Hindi
महाराज भर्तृहरि द्वारा
स्रोत: Neeti Shataka with Sanskrit Shlokas, Anvaya & Hindi Commentary by Dr. Rakesh Shastri (उद्गम)
DevanagariHindipublished194 पृष्ठ
पृष्ठ 22, कुल 194 में से
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शृंगारशतक में स्त्री सेवा ही सर्वोपरि बताई गई है—
मात्सर्यमुत्सार्य विचार्य कार्यं, आर्याः समर्यादमुदाहरन्तु।
सेव्या नितम्बाः किमु भूधराणामुत स्मरस्मेरविलासिनीनाम्॥ (२-१५)
किन्तु विषय भोग ही जीवन का लक्ष्य नहीं होना चाहिए। ये सब तो नाशवान् है, इसका प्रतिपादन भी द्रष्टव्य है—
भोगा न भुक्ता वयमेव भुक्तास्तपो न तप्तं वयमेव तप्ताः।
कालो न यातो वयमेव यातास्तृष्णा न जीर्णा वयमेव जीर्णाः॥