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नीति शतक (भर्तृहरि - डॉ. राकेश शास्त्री हिन्दी व्याख्या सहित)

नीति शतक (भर्तृहरि - डॉ. राकेश शास्त्री हिन्दी व्याख्या सहित)

Niti Shataka of Bhartrihari Hindi

महाराज भर्तृहरि द्वारा

स्रोत: Neeti Shataka with Sanskrit Shlokas, Anvaya & Hindi Commentary by Dr. Rakesh Shastri (उद्गम)

DevanagariHindipublished194 पृष्ठ

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४ श्रीभर्तृहरिविरचितम्

गई अच्छी-अच्छी बातों को सुनने में रुचि नहीं लेते हैं। दूसरी श्रेणी के ऐश्वर्यसम्पन्न लोगों को अपने धन का अत्यन्त अहंकार होने का कारण, वे उनकी बातों को नहीं सुनते। तीसरी श्रेणी के बचे हुए लोग अज्ञानी होने से उन बातों को चाहकर भी समझ नहीं पाते हैं। कवि कहता है कि इसलिए जो सुभाषित कोई विद्वान् कवि कहना चाहता है, अभिव्यक्ति का अवसर न मिलने के कारण उसकी मृत्यु के साथ ही नष्ट हो जाते हैं।

विशेष- १. प्रस्तुत श्लोक की भाषा अत्यन्त सरल, भाव बोधगम्य, प्रवाहपूर्ण एवं भावों की अभिव्यक्ति में समर्थ है।

२. इस संसार में सहृदयों के अभाव में बहुत सा काव्य हमारे सामने नहीं आ पाता है।

३. अच्छी-अच्छी, किन्तु उपदेशात्मक बातों को सुनने वालों का इस संसार में अभाव ही है।

४. अनुष्टुप् छन्द का प्रयोग हुआ है। लक्षण इस प्रकार है-- श्लोके षष्ठं गुरुज्ञेयं सर्वत्रलघुषञ्चमम्। द्विःचतुष्पादयोर्ह्रस्वं सप्तमं दीर्घमन्ययोः॥

५. यह श्लोक नीतिशतकम् की सभी प्रतियों में उपलब्ध नहीं हैं।

व्याकरणात्मक टिप्पणी-

१. √बुध् + तृच् (प्रथमा विभक्ति., बहुवचन) बोद्धारः। २. मत्सरेण ग्रस्ताः (तृतीया तत्पुरुष) = मत्सरग्रस्ताः। ३. √ग्रस् + क्त = ग्रस्तः (प्रथमा विभक्ति, पुल्लिंग., बहुवचन.) ग्रस्ताः। ४. सु + √भाष् + क्त = सुभाषितम्। √जॄ + क्त = जीर्णम्।

अज्ञः सुखमाराध्यः सुखतरमाराध्यते विशेषज्ञः। ज्ञानलवदुर्विदग्धं ब्रह्माऽपि च तं नरं न रञ्जयति॥४॥

अन्वय- अज्ञः सुखम् आराध्यः, विशेषज्ञः सुखतरम् आराध्यते, (किन्तु) ज्ञानलवदुर्विदग्धम् च तम् नरम् ब्रह्मा अपि न रञ्जयति।

अनुवाद- अज्ञानी को सरलता से समझाया जा सकता है, विशेषज्ञ को और भी अधिक सरलता से समझा सकते हैं, (किन्तु) ज्ञान का लेशमात्र प्राप्त कर (स्वयं को) विद्वान् मानने वाले उस व्यक्ति को तो ब्रह्मा भी प्रसन्न नहीं कर सकता है।

व्याख्या- इस संसार में तीन प्रकार के लोग होते हैं, अज्ञ, विशेषज्ञ और पण्डितमानी। इन तीनों व्यक्तियों के लिए महाकवि कहते हैं कि जो लोग कुछ नहीं जानते, उन्हें आप किसी बात को सरलता से समझा सकते हैं, क्योंकि अज्ञानता के कारण वह जो भी आप बताएँगे अच्छे शिष्य के समान स्वीकार करता चलेगा। इसी